Ravindra kaushik Indian Raw agent interesting full story | wife in Pakistan

Ravindra kaushik का जीवन परिचय

आज मैं RAW एजेंट Ravindra kaushik के दिलचस्प कहानी सुनाऊंगा जो पाकिस्तान में रहकर भारत के लिए काम करता था।

जासूसी दुनिया का फंडा बहुत अलग होता है ,गर आप दूसरे देश में जासूसी करते हुए आप पकड़े जाते हैं।

तो आपको किसी भी तरह की मदद नहीं की जाती है आमतौर पे और आपको पहचानने से इंकार कर देंगे।

और यहाँ तक ये भी होता है पकड़े जाने के बाद आप भी कुछ न बताये। ये हर किसी intelligence एजेंसी का रुल होता है, और ये बात आपको पहले ही बता दी जाती है कि गर आप दूसरे देश में पकड़े जाते हैं तो हमलोग आपको पहचानने से इंकार कर देंगे और ये हकीकत है, इसलिए ये जॉब बहुत सूझ बुझ समझकर करनी पड़ती और इसमें 99 % जान जाने की उम्मीद रहती है। किस तरह रविन्द्र कौशिक जाने के लिए तैयार हो जाते हैं, तो रविन्द्र कौशिक को किस तरह नाम बदल कर पाकिस्तान भेजा गया, और किसी को शक न हो इसके लिए रविन्द्र कौशिक जी एक बड़े फौजी के अफसर की बेटी से निकाह तक किया और उनसे से उनके बच्चे भी हुए।

आखिर किस तरह से इन्होंने पाकिस्तान में अपना घर बसाया और करीब 25 साल तक अपना जीवन पाकिस्तान में ही गुजारा और तो और मृत्यु तक पाकिस्तान के सर जमीं पे हुई। भारत सरकार ने किसी भी तरह से रविन्द्र कौशिक को लाने की कोई कोशिश ही नहीं की ये जानकर अफ़सोस होता है की विकल्प होने के बावजूद भी भारत सरकार ने रविन्द्र कौशिक को लाने की कोशिश नहीं की। आज जानेंगे शुरू से अंत रविन्द्र कौशिक के जीवन के बारे में, ये किस तरह पाकिस्तान घुसा वहां की फ़ौज में शामिल हुआ और कई सालो तक पाकिस्तान की फ़ौज में रहकर भारत को सारी ख़ुफ़िया जानकारी भारत को भेजता रहा।

रवीन्द्र कौशिक का जन्म और परिवार ( Birth & Family )

Ravindra Kaushik जी का जन्म राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में 11 अप्रैल 1952 को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ।

ये श्रीगंगानगर पाकिस्तान बॉर्डर के किनारे ही है, इनके पिता जी का नाम JM Kaushik जो AIR FORCE में थे, और रिटायर हो चुके थे और एक मिल में काम करते थे रविन्द्र कौशिक 4 भाई बहन थे जिसमे ये दूसरे नंबर पर थे। Ravindra kaushik के माता जी जा निधन 2006 में हुई, रविन्द्र कौशिक के बड़े भाई राजेश्वरनाथ कौशिक जयपुर में रहते हैं।

और उसका एक भतीजा भी जिसका नाम विक्रम वशिष्ट है जो अभी जयपुर में ही रहते हैं।

सबसे बड़ी इनकी बहन थी, रविन्द्र कौशिक को बचपन से ही इनको एक्टिंग करने का बड़ा शौक था, और कॉलेज के दौरान ही सारे थिएटर/एक्टिंग भी किया करते थे, एक्टिंग करने का बड़ा शौक था, ऐसा एक्टिंग कि देखने में एकदम असली जैसा लगे, और हमेशा एक्टिंग देशभक्ति पर आधारित होती थी।

रविन्द्र कौशिक का शिक्षा ( Education )

Ravindra kaushik जी की पढाई लिखाई राजस्थान के श्रीगंगानगर से गवर्नमेंट स्कूल से हुई,

और इसके बाद इन्होंने S.D. बिहानी कॉलेज श्री गंगानगर से ही B.com किया। जब ये पाकिस्तान गया था

वहां से इन्होंने LLB की डिग्री ली थी जिसकी मदद से वो पाकिस्तान की army में भर्ती हो सका।

Ravindra kaushik जासूस कैसे बना?

बात सन् 1975 की है जब रविन्द्र कौशिक लखनऊ में एक Youth Festival में भाग लिया जहाँ थिएटर प्रोग्राम का

भी आयोजन किया था। वहां पर कुछ RAW के एजेंट भी थिएटर देखने आए थे, इस Festival के नाटक में

रविन्द्र कौशिक एक भारतीय जासूस का किरदार का रोल कर रहे थे। जो चीन के कब्जे में था वो पकड़ा गया था, उसे वहां किस तरह से यातनाएं दी जाती है, इसके बावजूद उस RAW जासूस ने कुछ नहीं बताया। इन्होंने उस किरदार को बहुत अच्छे ढंग से निभाया, हर पीड़ा को सहता, इतनी अच्छी Acting देखकर वहां बैठे RAW के अधिकारी ने कहा कि तुमने बहुत ही जबरदस्त एक्टिंग की है। लेकिन यह थिएटर में तक ही सिमित रह जाएगी गर सच में देश के लिए कुछ करना चाहते हो तो तुम दिल्ली में आकर मिलो तुम्हारे लिए हमारे पास एक खास काम है। रविन्द्र कौशिक ने हां भी भर दी और कहा ठीक है, 1975 के अंत में ही रविन्द्र कौशिक दिल्ली पहुंचते हैं और तब तक उसे पता भी नहीं था की उसे कौन सा काम करना है किस तरह का काम करना है।

और ये RAW क्या है इससे पहले रॉ का नाम कभी सुना नहीं था, वहां जाने के बाद वहां उसने

2 लोग मिलते है जो उसे दिल्ली के रॉ के ऑफिस ले जाते हैं और वहां से उसे पहली बार पता चलता है कि हमारे देश की एक ख़ुफ़िया एजेंसी है जिसका नाम रॉ है। उसके बाद रॉ के कुछ ऑफिसर रविन्द्र कौशिक को अलग अलग देशों में भारत के जासूसों ने जो कारनामे किये थे उसके बारे किस्से सुनाते है। और उसे फुलाया जाता है जिसको सुनकर रविन्द्र कौशिक बड़ा प्रभावित होता है और उसके बाद उसको ऑफर देती है की बताओ गर तुम्हे जासूस बनना है तो बताओ

नोट :- इससे पहले भी जब रविन्द्र कौशिक थिएटर करता था तब भी RAW एजेंट की नजर उस पर थी ये जो एजेंसी है ये वैसे लोगो को चुनती है जो बॉर्डर के किनारे रहती है और श्रीगंगानगर भी पाकिस्तान के बॉर्डर के पास है और जिसमे देश भक्ति का जज्बा हो और उस पर एजेंसी के कुछ खबरी भी पहले से उसके बारे में जानकारी ले रही थी।

रविन्द्र कौशिक को ट्रेनिंग कैसे दी जाती है?

और उसके बाद रविन्द्र कौशिक हाँ कर देते हैं वो जासूस बनने के लिए तैयार हो जाते हैं इसके बाद

रविन्द्र कौशिक की ट्रेनिंग की शुरुआत होती है। और उसे बताया जाता है की वो अपने घर में भी

नहीं बताएगा की वो क्या कर है और उसके बाद रविन्द्र कौशिक को ट्रेनिंग दी जाती है।

  • दिल्ली, पठानकोट और अमृतसर यहाँ इनको ट्रेनिंग दी जाती है।
  • रविन्द्र कौशिक पंजाबी भी अच्छे से बोल लेते थे, इनको पाकिस्तान में जाकर रहना था तो इसके लिए उर्दू आना जरुरी था, पढ़ना भी लिखना भी और साथ में बोलना भी।
  • और नाम भी बदलना होगा तो जिस समय वो पाकिस्तान जाता है उसका नाम भी बदला जाता है
  • जिसमे पाकिस्तान में पहले से मौजूद रॉ एजेंट सब अरेंज कर देती है
  • बाद उसे सारी तालीम दी जाती है, उसे अरबी भी सिखाई जाती है कुरान सरीफ पढाई जाती है नमाज सिखाई जाती है।

उसे वो हर छोटी छोटी चीज सिखाई गई, जो प्रतिदिन इस्लाम प्रयोग में होता है।

और जो पाकिस्तान में प्रतिदिन होती है, पूरी मुस्लिम रीती रिवाज सिखाई गई, ये पहला फेज था अब दूसरा फेज – नेता कौन कौन है वहां का, अब spy के बारे में बताई जाती है एक होता है शोर्ट टर्म जासूसी और एक होता है long Term जासूसी इसके क़ाबलियत के हिसाब से रविन्द्र कौशिक को Long term के लिए पाकिस्तान मिशन पर भेजा जाना था। और अब जो आखिरी चीज बची वो था खतना ये भी करवाया जाता है ताकि इस पर शक की कोई गुंजाइश ही नहीं बचे।

Ravindra kaushik को ट्रायल पर अन्य देश भेजा जाता है

  • अब इसके बाद इन्हें 5 – 6 अलग अलग मुल्को में ट्रायल के लिए भेजा जाता है।
  • छोटे छोटे मिशन पे भेजा जाता है, जिसमे वे सफल भी हो जाते हैं।
  • और उसके बाद रविन्द्र कौशिक को पाकिस्तान भी ट्रायल बेसिक पर भेजा जाता है और वहां भी कामयाब होता है।
  • इसमें जो बेसिक चीजे होती है ये होती है की आप वहां जाकर अपना नेटवर्क खुद बनानी पड़ती।
  • एक अपनी खुद की एक पहचान बनानी पड़ती है।
  • अपना खुद का एक सोर्स बनानी पड़ती है जिससे आप वहां एक आदमी एक की तरह रह सके।
  • 1977 तक सारे ट्रेनिंग और ट्रायल पूरे हो जाते है और तब रविन्द्र कौशिक को पाकिस्तान भेजने की हो रही थी।
  • रविन्द्र कौशिक को पाकिस्तान में long term रहकर सारी ख़ुफ़िया जानकारी भारत भेजने की planning थी।

यहाँ एक सवाल उठता है कि रविन्द्र कौशिक को ही पाकिस्तान की ख़ुफ़िया जानकारी भेजने के लिए जासूस क्यों चुना?

रविन्द्र कौशिक को पाकिस्तान मिशन पर भेजने का 2 मुख्य कारण था जो ये थी।

  • 1965 और 1971 की जंग भारत के साथ हो चुकी थी, 1971 में भारत की मदद से बांग्लादेश बन था।
  • इसको लेकर पाकिस्तान बौखलाया हुआ था जिसको लेकर वो बदला अवश्य लेगा और प्लानिंग भी कर रहा होगा।
  • इसलिए अगला पाकिस्तान की क्या चल होगी वो किस तरह का प्लान बना रहा है इन सारी चीजो के बारे में जानना बेहद जरुरी था और खास करके डिफेंस सेक्टर में।

रविन्द्र कौशिक पाकिस्तान कैसे घुसता है? | Ravindra kaushik Pakistan mission

Pakistan में Ravindra kaushik का पहचान पत्र और राशन कार्ड भी बन चुका था रॉ एजेंसी के लिए ये सब आसान होती है। वहां आम लोगो की तरह रहना होता है और ख़ुफ़िया तरीके से किसी को पता चले जासूसी करनी पड़ती है। जाने से पहले उसने घर वालो को भी नहीं बताया की वो पाकिस्तान जा रहा है क्योंकि इसमें जो डील थी और कुछ शर्त थी। जिसे मानना जरुरी भी था, घर वालो को रविन्द्र कौशिक ने बताया की उसे दुबई में काम मिल गया है। और वह दुबई जा रहा है ये कहकर घर से निकला गया, नबी अहमद शाकिर के नाम से रविन्द्र कौशिक करांची पहुँचने के बाद शुरू में वहां उसे पहले से मौजूद भारत के कुछ और जासूस उसकी मदद करते है और धीरे धीरे लोगो से घुलना मिलना चालू कर देते हैं।

उस वक्त उसकी उम्र मात्र 23 साल थी और उसकी जासूसी की दुनिया अब शुरू हो जाती है।

रॉ ने जितना सोचा था उससे कहीं ज्यादा होशियार तेजी से काम करने वाला जासूस मिल गया था।

पाकिस्तान जाकर सबसे पहले Ravindra kaushik क्या करता है?

नबी अहमद शाकिर के नाम से पाकिस्तान पहुँचने के बाद वहां उसने करांची के एक लॉ कॉलेज में एडमिशन ले लेता है नबी अहमद शाकिर के नाम से और वहां से लॉ की LLB की डिग्री भी लेता है। और ग्रेजुएशन करने के बाद चूँकि उसे वहां जासूसी करना था वहां तो उसे एक आईडिया आता है। और अब तक दुनिया में ऐसा पहली बार होने जा रहा था की कोई जासूस किसी के डिफेन्स में घुसकर जासूसी करनेवाला था और ये चीज भारतीय रॉ को भी उम्मीद कभी नहीं थी और किसी को विश्वास ही नहीं हुआ कि कुछ ऐसा होनेवाला था। तो उसने वहां की एक उर्दू के न्यूज़ पेपर में एक विज्ञापन देखता है कि उसमे पाकिस्तानी आर्मी की vacancy निकली थी। जिसमे लिखा था की पाकिस्तानी आर्मी में कुछ लोगो की जरुरत है।

और रविन्द्र कौशिक को लगा कि इससे अच्छा मौका हो ही नही सकता है और उसने तुरंत आर्मी में

अप्लाई कर दिया। और किस्मत भी साथ देता है और उसका पाकिस्तानी आर्मी में चयन भी हो जाता है।

और अब वह पाकिस्तानी आर्मी में नबी अहमद शाकिर के नाम से एक ऑफिसर बन चुका होता है।

जब ये खबर भारतीय रॉ को होती है तो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं होता है, और धीरे धीरे Ravindra kaushik का प्रोमोशन भी होता है और ऐसे ही करते करते नबी अहमद शाकिर ( रविन्द्र कौशिक) मेजर के पद तक पहुँच जाता है। जिसकी किसी को वैसी उम्मीद ही नहीं थी, जो काबिले तारीफ थी, इसके बाद धीरे धीरे ख़ुफ़िया जानकरी भारत के रॉ के पास भेजना चालू करती है जिससे भारत सरकार को बहुत फायदा भी होता है। पाकिस्तान के एक एटॉमिक पॉवर स्टेशन के बारे में अहम् सारी ख़ुफ़िया जानकारी भारत तक पहुंचाई। इसके लिए ब्लैक टाइगर का ख़िताब खुद इंदिरा गाँधी जी देती है।

और पाकिस्तानी आर्मी डिफेंस के बारे में बहुत सी जानकारी वहां की सेना हिफाजत कैसे

और उसके लिए क्या क्या कदम उठा रही है उसकी सारी जानकरी भारत को दी जिससे

भारतीय सेना कई बार मदद भी हुई और जान भी बचाई गई।

रविन्द्र कौशिक की अमानत से शादी/निकाह कैसे हुई?

उसी आर्मी में काम करने वाले एक ऑफिसर की बेटी अमानत उससे रविन्द्र कौशिक को प्यार हो जाता है। रॉ की दुनिया में अगर लम्बे समय के मिशन पर है तो आप शादी भी कर सकते है लेकिन उसके लिए रॉ से परमिशन लेनी पड़ती है। तो उसने रॉ तक यह बात पहुंचाई की गर वह वहां शादी कर ले तो और बढियां होगा जिससे कि किसी को शक की कोई गुंजाइश ही नही रहेगी और दरअसल रविन्द्र कौशिक को सच में उस लड़की से प्यार हो गया था। और शादी भी करना चाहता था इसमें रॉ की मंजूरी मिलना जरुरी था, बगैर परमिशन के शादी मुमकिन नहीं थी और रॉ ने भी हाँ कर दी। और कहा ठीक है कर लो शादी और उसके बाद नबी अहमद शाकिर (रविन्द्र कौशिक) ने अमानत से निकाह किया उसके बाद इनका एक बेटा हुआ जिसका नाम अरीब रखा गया।

नबी अहमद शाकिर (रविन्द्र कौशिक) के बारे अमानत को सिर्फ ये पता था कि ये एक पाकिस्तानी आर्मी में हैं।

Ravindra kaushik के घर वाले इन्तेजार कर रहे थे

और इधर ऐसे ही 4 – 5 साल बीत गए और पहली घर वाले परेशान हो रहे थे की बेटा बता के गया की वो काम करने दुबई जा रहा है और कुछ साल हो गए और मिलने के लिए एक बार भी अभी तक नहीं आया। बीच बीच में पत्र भी आता था 1981 में गंगा नगर उनके छोटे भाई की शादी थी उसे ये बात पता थी वो भाई से प्यार भी बहुत करता था। और शादी में आना भी चाहता था, तो रविन्द्र कौशिक ने रॉ से बात की और उसके बाद रॉ ने किसी तरह इन्तेजाम किया। आप सोच सकते है कि कोई जासूस गर पाकिस्तान से भारत आता है तो यहाँ रिस्क भी बहुत था गर यहाँ आता और ये बात लिक हो गई, कोई उसे कोई पहचान ले तो। क्योंकि उसके जैसा पाकिस्तानी ख़ुफ़िया जासूस यहाँ भी हो सकता है जिससे गड़बड़ हो सकती है।

तो किसी तरह भारत के रॉ ने रविन्द्र कौशिक को वापस हिन्दुस्तान उसके घर शादी में शामिल होने के लिए

एक प्लानिंग होती है। रविन्द्र कौशिक उम्रह करने के बहाने सऊदी अरब जाता है और वहां से दुबई जाता है।

(उम्रह - मक्का, हिजाज, सऊदी अरब के लिए इस्लामी तीर्थयात्रा होता है, जो मुसलमानों द्वारा कभी भी किसी वक्त भी किया जा सकता है।)

Ravindra kaushik पहली बार और आखिरी बार अपने घर कब आया था?

और उसके बाद हमारी रॉ की मदद से दुबई से चोरी छुपे Ravindra kaushik को भारत ले के आती है। ये बात पाकिस्तान में किसी को पता नहीं थी, क्योंकि वो तो वहां के हिसाब से उम्रह करने के लिए सऊदी अरब गया है लेकिन यहाँ वो भारत आया था ये बात किसी को पता नहीं थी सिवाय भारतीय रॉ के, और पहली बार सन् 1981 में रविन्द्र कौशिक अपने घर श्रीगंगानगर आता है। और शादी में शामिल होता है और रविन्द्र कौशिक पर भी घर वाले दबाव डालता है की तुम भी शादी कर लो तुम इस घर के बड़े हो। और किसी तरह पिताजी को बता पाता है की उसने शादी दुबई में ही कर ली है। और लड़की मिडिल क्लास की है ये एक झूटी कहानी बना के बता देते हैं जो हकीकत नहीं होती है।

इसमें हकीकत सिर्फ ये थी की शादी तो इसने की थी लेकिन दुबई में नहीं पाकिस्तान में और उस

रविन्द्र कौशिक की बीबी अमानत पाकिस्तान में प्रेग्नेट थी और जब घर वालो ये झूटी कहानी सुनाई।

जिससे उसके घर वालों ने विश्वास भी किया और कुछ वक्त के लिए तो सदमा भी लगा की बगैर बताये

इन्होंने शादी कर ली और बताया तक नहीं। किसी तरह परिवार वाले मान जाते हैं खास करके उनके पिताजी और शादी खत्म होते ही सन् 1981 में अपने घर से बिदा लेता है और कहता है वापस दुबई जा रहा है। और उसके बाद वहां से वो निकल जाता है, और फिर पाकिस्तान पहुँच जाता है दुबई से सऊदी फिर पाकिस्तान किसी को पता भी नहीं चलता है की वो भारत गया था। 1981 की रविन्द्र कौशिक की परिवार के साथ ये आखिरी मुलाकात थी इसके बाद रविन्द्र कौशिक अपने परिवार से कभी मुलाकत नहीं होती है।

और पाकिस्तान जाने के बाद फिर से पहले जैसा अपना काम में लग जाता है, उसके काम से

रॉ खुश होते हैं, उसकी वजह से कितने ही भारतीय फ़ौज की जान भी बचती है। और ये सिलसिला

ऐसे ही चलता रहता है, 1983 तक Ravindra kaushik सारी जानकारी दे रहा था। पुरे जीवनकाल में रविन्द्र कौशिक

एक बार भी पकड़ा नहीं जाता है, कभी शक तक नहीं उस पर कोई किया जबकि हर फ़ौज में भी हर किसी की जासूसी की जाती है लेकिन किसी और की गलती से 1983 में रविन्द्र कौशिक पकड़ा जाता है और ये गलती किसकी थी।

रविन्द्र कौशिक किसकी गलती से पकड़ा जाता है?

इसमें होता ये है की रॉ की एक और एजेंट जो पंजाब का रहने वाला था उसे पाकिस्तान भेजती है।

और उसका भी नाम और पहचान सब बदला हुआ था उसका नाम रखा गया था इनायत मसीह (Inayat Masih)

जिसे जिसे शोर्ट टर्म मिशन पर भेजा जाता है इनायत मसीह (Inayat Masih) को साल सन् 1983 अप्रैल का महिना था और इसे बताया गया था की वहां उसका एक एजेंट है जो पाकिस्तानी आर्मी में है उसका नाम नबी अहमद शाकिर है। उन तक एक document पहुँचाना है, और कुछ मेसेज देना है और इनायत मसीह को document के साथ नाम बदलकर उसे पाकिस्तान भेजा जाता है। करांची में इनकी मुलाकात नबी अहमद शाकिर से होनी थी। लेकिन बदकिस्मती से जब इनायत मसीह पाकिस्तान बॉर्डर पार करता है किसी शक पे उसे पाकिस्तानी आर्मी गिरफ्तार कर लेती है। और उसके बाद उससे पूछताछ करने लगती है, कुछ न बताने पर उसे टॉर्चर किया जाता है टॉर्चर करने के बाद वो इनायत मसीह टूट जाता है और वो सब सच सच बता देता है वो किससे मिलने आया है।

जब पाकिस्तानी आर्मी पूछता है यहाँ किससे मिलना है क्या काम है? तो ये बताता है की उसे करांची में

भारतीय RAW एजेंट से मिलना है, और उस एजेंट का नाम नबी अहमद शाकिर है जो पाकिस्तानी आर्मी में है।

ये सुनकर पाकिस्तानी आर्मी के पाँव तले जमीन खिसक जाती है, ये एक कहावत है सच मत मान लेना, और ये स्वाभाविक भी है की हमारे ही आर्मी में एक जासूस है वो भी इंडिया का है। और उसका अलसी नाम भी बता देता है रविन्द्र कौशिक नाम है। ये सब जानकारी मिलने के बाद पाकिस्तानी आर्मी एक चाल चलती है और वो इनायत मसीह को अपने साथ ले जाकर करांची पहुँचती है और इनायत मसीह से कहता है।

जो तुम्हारा मिलने का जगह और जो टाइमिंग फिक्स थी तुम उसी टाइमिंग और जगह पर जाओगे और ये

document ले कर जाओगे। करांची के जिन्ना गार्डन में इन दोनों की मुलाकात फिक्स थी फ्राइडे का दिन थी।

जुम्मा के दिन गार्डन में भीड़ कम होती है सन् 1983 अप्रैल का महिना था और सुबह करीब

7 : 30 बजे के आसपास इनायत मसीह जिन्ना गार्डन पहुँचता है। तय समय के मुताबिक नबी अहमद शाकिर गार्डन में पहुँचते है। दोनों एक बेंच में बैठते है और अनजान की तरह बातचीत होती है और उसको वो document देता है। और जैसे है document का लेन देन होता है वहां पहले से छिपे पाकिस्तानी आर्मी सब देख रहा था और अचानक आते हैं और चारो तरह से नबी अहमद शाकिर को घेर लेते हैं। और उसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है।

नोट :-  यहाँ एक सवाल खड़ा होता है की मतलब की ये जो इनायत मसीह जो एजेंट था उसे जरा सा भी दिमाग नहीं था की उसे न बताने से सिर्फ एक जान ही जाएगी लेकिन गर सच्चाई बता दी तो दो लोगों की जान चली जाएगी। उसे इतना भी पता नहीं थी और कैसा रॉ एजेंट था जिसे देशभक्ति की अहमियत तक पता नहीं थी। उसके पास तो इतना कोमन सेंस होना चाहिए था की चाहे मुझे मार दे लेकिन मैं उसके बारे नहीं बताऊंगा अगर बता दिया तो वो तो मरेगा ही साथ में मुझे भी ये लोग नहीं छोड़ेंगे। इतना तो उसके दिमाग में भेजा होना चाहिए था लेकिन अफ़सोस एक बेवकूफ एजेंट की कारण एक सफल रॉ एजेंट को अपनी जान गवांनी पड़ी, उसे लगा की वो सच बोल के बच जायेगा, इनायत मसीह की भी पूरी कहानी अगले Article में ले के आता हूँ।

रविन्द्र कौशिक को पकड़ने के बाद पाकिस्तानी आर्मी उसके साथ क्या क्या करती है?

और फिर जो जुल्म ए सितम का दौर शुरू होता है वो आप अंदाजा लगा ही सकते है की

जासूसी के क्राइम में दुसरे देश में पकड़ाने पर किस तरह का सजा और यातनाएं दी जाती है।

और जासूसों से सारी जानकारियां निकालने के लिए जो टॉर्चर किया जाता है उसका अंदाजा लगा ही सकते हैं। बर्फ पे लेटा कर मारना, करंट लगाना, हाथ पैर बांध कर लटका देना जिसमे आपको नींद तो आएगी लेकिन आप सो नहीं पाएंगे। ऐसी ऐसी जगह पर रखा जाता है जहाँ आपको ये भी पता नहीं चलता की रात है या फिर दिन कई कई दिन भूखा प्यासा रहना, ये सब कुछ होता है रविन्द्र कौशिक के साथ। और इसी बीच उसकी बीबी अमानत पाकिस्तानी फ़ौज की बेटी जिसके साथ रविन्द्र कौशिक ने शादी की उसको भी पता चल जाती है। और उसे पहली बार पता चलता है कि जिससे उसने शादी की जिसको वो अपना शौहर मानती है दरअसल वो के हिन्दुस्तानी रॉ एजेंट है और वो एक हिन्दू है।

और एक ही बार सियालकोट जेल में मिलने आती है और बेटे अरीब (Areeb) के साथ, और उसके बाद

रविन्द्र कौशिक जब तक पाकिस्तान के जेल में जिन्दा बंद थे उसके बाद एक बार भी मिलने नहीं आती है।

उसकी पत्नी अमानत। रविन्द्र कौशिक ने एक ख़त में लिखा भी की मेरी वजह से उसकी जिंदगी हराम हो गई।

और जब पाकिस्तानियों के कुछ लोगो को पता चला की ये रविन्द्र कौशिक की बीबी है जो जासूस है तो स्वाभाविक है उस पर बाते होने लगी और उसके फैमिली को भी परेशान किया जाने लगा और जुल्म भी ढाए गए। इसके बाद रविन्द्र कौशिक से पाकिस्तनी आर्मी पूछता है कि तुमने अभी तक कौन कौन सी जानकारियां लिक किये हो लेकिन वो इतना बहादुर और एक सच्चा देशभक्त था उसने कुछ नहीं बताया।

जुबां नही खोला भले उस पर लाखो सितम किये गए लेकिन वहीं इनायत मसीह तुरंत टूट गया।

और रविन्द्र कौशिक के बारे में सब सच्चाई बता दी अगर ये इनयात मसीह नहीं जाता तो शायद ये दिन आता ही नही और आज भी रविन्द्र कौशिक हमारे बीच जिन्दा होते। और आगे भी ये जासूसी कर रहे होते लेकिन एक जासूस की गलती से दूसरा जासूस पकड़ा गया मार खाता रहा लेकिन अपनी जुबां तक नहीं खोली। कभी सियालकोट जेल तो कभी लखपत राय जेल कभी मियांवाला जेल में अलग अलग जेल में रखा गया। और फिर उसके बाद आर्मी कोर्ट में मुकदमा चला और मुकदमा चलने के बाद उसे अदालत ने फांसी की सजा सुनाई। और इस बीच ये सब कुछ हो रहा था और रविन्द्र कौशिक को लगातार ये उम्मीद थी कि भारतीय सरकार उसे आजाद करा लेगी। उसकी एक और वजह और है कि अकसर जब दो मुल्को की बीच में ये होता है।

की जब कोई जासूस पकड़ा जाता है तो दो मुल्को के बीच जासूसों की अदला बदली भी होती है

इसमें ये होता है की उसने 3 जासूस पकड़ा है और इसने 3 जासूसों को पकड़ा है तो तुम 3

जासूस छोड़ दो मैं 3 तीन जासूस को छोड़ देता हूँ ऐसा पहले भी कई बार हुआ है

और अब भी होता। इस बात की पूरी उम्मीद थी रविन्द्र कौशिक को।

रविन्द्र कौशिक किस तरह वहां से पत्र लिखता था?

Ravindra kaushik ने किसी तरह भारत सरकार को ख़त लिखा और घर पर भी और जब एक दिन श्रीगंगानगर में उसके घर पर एक letter पहुँचता है। ये letter उसके पिताजी के हाथ लगती है और उसे पढता है उसे पहली बार पता चलता है कि उसका बेटा पाकिस्तान के जेल में है और उसे जासूसी के आरोप में फांसी की सजा हुई है। और उसमे रविन्द्र कौशिक लिखता है कि वो भारत सरकार से निवेदन करे मीडिया से बात कर मुझे रिहाई दिलाये। ये मुमकिन है, संभव है, और ये खत पढने के बाद ही उसके पिताजी को दिल का दौरा पड़ता है और उसकी मृत्यु हो जाती है। कुछ वक्त तक उस खत के बारे किसी को पता नहीं चल पाता है वो खत घर में ही जैसे तैसे मरोड़ कर पड़ा रहता है किसी की नजर तक नहीं पड़ती है।

लेकिन रविन्द्र कौशिक के पिताजी की मौत के कुछ दिन बाद घर के एक मेम्बर की नजर उस इंग्लैण्ड खत पर पड़ती है और ये ख़त उर्दू में लिखा था। और उसके घर में उर्दू पढना सिर्फ उसके पिताजी को ही आती थी और उसके बाद गंगा नगर में ढूँढा जाता है जो उस letter को पढ़ सके जो उर्दू में लिखी हुई है। और उसके बाद एक उर्दू पढने वाले को बुलाया जाता है और उसके बाद खत को पढ़ा जाता है तब उसके घर वालो को पहली बार पता चलता है की रविन्द्र कौशिक पाकिस्तान के सियालकोट जेल में बंद है। और उसे फांसी की सजा हुई है और उसके बाद परिवार वाले दिल्ली दौड़ते हैं और उसमे लिखा था की दिल्ली में वो होम सेकेट्री से बात करे।

भारत सरकार रविन्द्र कौशिक की किस तरह मदद करती है?

तो उनके परिवार वाले दिल्ली जाकर उससे मिलते है लेकिन वहां भारत सरकार उसकी किसी भी तरह से

मदद करने से इंकार कर देती है। भारत सरकार कोई भी मदद नहीं करती है और धीरे धीरे ख़त

आता रहता है और एक ख़त में रविन्द्र कौशिक ने ये तक लिख दिया की मुझे ये उम्मीद नहीं थी

की देशभक्ति का ये मुझे सिला मिलने वाला है। अगर मैं अमेरिका का एजेंट होता तो 3 तीन में

वो मुझे छोड़ा कर ले जाता और मैं सालो से यहाँ पड़ा हूँ लेकिन सरकार कोई मदद नहीं कर रही

शायद मैं अब कोई काम का नहीं हूँ लेकिन मैंने जो वायदा किया था मैंने अभी तक कुछ नहीं बताया यहाँ किसी से, और न ही कभी बताऊंगा। इस बीच जब रविन्द्र कौशिक सियालकोट जेल में बंद थे तो तभी दो और जासूस पकड़ाते हैं। एक करामत त्राहि औरदूसरा गोपाल दास, और जब ये दोनों वहां पहुँचते है तो Ravindra kaushik के बारे पता चलती है। और तब तक रविन्द्र कौशिक की तबियत खराब हो रही थी, टॉर्चर की वजह से खाना न मिलने की वजह से और उन्हें टीबी की बीमारी हो जाती। हर समय साँसे फूलना खांसते रहना टीबी का सही समय पर इलाज न मिलने से मरीज की मौत भी हो जाती है। उसके कुछ दिन बाद दोनों जासूस को पाकिस्तानी जेल से रिहाई मिल जाती है, बगैर भारत सरकार की मदद से तो रिहाई तो हो ही नहीं सकती थी।

और जब करामत त्राहि हिन्दुस्तान लौटते हैं वो रविन्द्र कौशिक की आखिरी वक्त की जेल की कहानी भी सुनाते हैं।

रविन्द्र कौशिक का जेल में दिन कैसे गुजरता है?

जब वो दोनों जासूस पाकिस्तान जेल से रिहा हुए थे तो Ravindra kaushik ने उसको कुछ खत भी दिए थे।

और साथ में अपने बीबी और बेटे की फोटो भी करामत त्राहि को दिया था, और कहा कि जब वो हिन्दुस्तान पहुंचे तो उसे उसके घर तक पहुंचा दे अगर कभी बेटा हिन्दुस्तान आये तो उसे पहचान सके। करामत त्राहि तो किस्मत वाले थे वो हिन्दुस्तान लौट आय, लेकिन कुछ साल बीतने के बाद पाकिस्तानी कोर्ट में अपील हुई फांसी के खिलाफ और सुप्रीम कोर्ट ने इस फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया। और 25 साल की उम्रकैद कर दी गई। और तब तक अलग अलग जेलों में रविन्द्र कौशिक को रखा जा रहा था और टॉर्चर भी किया किया जा रहा था। और अंत में उसकी सेहत खराब हो जाती है और एक और ख़त लिखता है और घर वालो को बताता है कि उसे सांस लेनें में तकलीफ हो रही है उसे टीबी हो गई है।

और यहाँ पाकिस्तान में टीबी की दवा नहीं मिलती है गर हो सके तो टीबी की दवा भेज दे।

तो किसी तरह रविन्द्र कौशिक के घर वालो ने यहाँ से पाकिस्तान दवा भेजवाई।

Ravindra kaushik अपने घर की खबर आखिरी बार कैसे लेती है?

तो रविन्द्र कौशिक को पहली बार अपने परिवार वालो के बारे में पता चलती है जब पाकिस्तान के सियालकोट के जेल में रविन्द्र कौशिक बंद था और जब वहां पर एक रेडियो कार्यक्रम आया करता था। पाकिस्तान में जिस प्रोगाम का नाम मिटटी की खुशबू थी और ये program जेल के कैदियो को भी सुनाया जाता था। तो किसी तरीके से रविन्द्र कौशिक ने यहाँ पर भी अपना जासूसी दिमाग लगाया और उन्होंने किसी तरह ये मेसेज बाहर तक भेजवाया। कि एक बार कोई मेरे परिवार का इस रेडियो के जरिये प्रोग्राम में ले के आये और अपने बारे में बताएं और तब उस कार्यक्रम के जरिये पहली बार पता चलता है की उसके पिताजी का निधन हो गया है और परिवार की हालात सही नहीं है और पूरी परिवार श्रीगंगानगर से जयपुर शिफ्ट हो गई है तो ये सारी चीजे पता चलती है उस रेडियो के माध्यम से।

रविन्द्र कौशिक की मृत्यु कैसे होती है?

रविन्द्र कौशिक टीबी के बीमारी से ग्रसित तो थे ही और अब दिल की बीमारी से भी ग्रसित हो चुके थे और 21 नवम्बर 2001 को मुल्तान जेल में रविन्द्र कौशिक की बीमारी से मौत हो जाती है। 16 साल तक रविन्द्र कौशिक और उसके पूरे परिवार वाले भारत सरकार से गुजारिश करती रही लेकिन किसी ने कभी एक न सुनी। सब सरकार आई और चली गई और किसी भी सरकार ने रविन्द्र कौशिक को पाकिस्तान जेल से लाने की दिल से कोशिश नहीं की। जिस तरह से रविन्द्र कौशिक ने देश की सेवा की है उसके बदले उसे वो चीज कभी मिली ही नहीं। कोई उम्मीद ही नहीं दिख रही थी ये सिल्ला मिलता है सच्चे देशभक्ति दिखाने की हमारे भारत देश में जबकि उसे पता थी की वो मौत के मुंह में जा रहा है।

लेकिन सरकार के पास उसको बचाने के कई रास्ते थे क्योंकि कुछ और जासूस तो आये थे पाकिस्तान जेल से

रिहा होकर रविन्द्र कौशिक भी लाया जा सकता था लेकिन भारत सरकार उसके लिए कोशिश ही नही करती है।

और उसकी मौत के बाद पाकिस्तान के मुल्तान जेल के पीछे ही रविन्द्र कौशिक को दफन कर दिया जाता है,

क्योंकि वहां पर उस हिसाब से वो नबी अहमद शाकिर था।

रविन्द्र कौशिक का आखिरी पत्र और उसमे क्या लिखा था?

मरने से 3 दिन पहले रविन्द्र कौशिक एक आखिरी खत अपने घर वालो के लिए लिखा था, और वो खत

उन्हें मिला भी और उस खत में शिकायत यही थी कि जिस देश के लिए मैंने इतना कुछ किया उस देश के लिए मैं शायद अब कोई काम का नहीं रहा। इसलिए उन सब ने मुझे छोड़ दिया, भुला दिया और रविन्द्र कौशिक वापस जिंदगी में कभी जिस देश की जमीं के हिफाहत के लिए वो दूसरा मुल्क गया उस देश की मिट्टी तक भी नसीब नहीं हुई रविन्द्र कौशिक को और उसे पाकिस्तान की सर जमीं में दफ़न कर दी गई

रविन्द्र कौशिक जी के जैसा कोई दूसरा जासूस नहीं

ये कहना गलत नहीं होगा की आज तक हमारे देश में रविन्द्र कौशिक जी के जैसा कोई दूसरा जासूस नहीं।

और न ही आनेवाले समय में कभी रविन्द्र कौशिक जी के जैसा कोई बन पायेगा रविन्द्र कौशिक के जैसा दिलेर हर चीज में माहिर चंद सेकेंडो में हर चीज का जुगाड़ इससे जहीन और बहादुर दूसरी कोई मिसाल हो ही नहीं सकती है। ये खुद एक ऐसी मिसाइल थे जिसको रोकना मुश्किल था लेकिन सरकार की ही गलती से ये पकड़ा गया जो दुश्मन के मुल्क सेना में घुसकर ऐसा कोई कारनामा कर दिखाये। ये सबसे बड़ा सवाल खड़े करता है कि क्या हमलोग उसके लिए कुछ नहीं कर सकते थे क्या ये सरकार कुछ नहीं कर सकती थी। ये सरकार क्या झुनझुना बजा रही थी ऐसे बहुत सारे पाकिस्तानी जासूस थे हिन्दुस्तान में उसका अदला बदली किया जा सकता था शर्ते हो सकती थी वादे हो सकती थी बाते हो सकती थी।

लेकिन ये चीजे नही हुई उसके परिवार वाले आज भी उसकी शिकायत करते हैं सरकार चाहती तो रविन्द्र कौशिक

को हिन्दुस्तान लाया जा सकता था लेकिन ऐसा हुआ नहीं सच तो ये भी हो सकता है की

रविन्द्र कौशिक को लाने से सरकार को नुकसान हो सकती थी। …….. more QA

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Anshuman Choudhary

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