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फिलिस्तीन का इतिहास क्या है? | फिलिस्तीन की समस्या क्या है? | इजराइल का इतिहास

फिलिस्तीन का इतिहास क्या है? | फिलिस्तीन की समस्या क्या है? | इजराइल का इतिहास

आज मैं आपको Israel के इतिहास के बारे में बताऊंगा कि आखिर Palestine से युद्ध क्यों हो रहा है।

ये आज का युद्ध नहीं है ये युद्ध करीब 150 साल पुराना है, जब ब्रिटेन शासन काल में अरबी लोगो

और यहूदी जो वर्तमान में इजराइली है उसके बीच हिंसा शरू हुई। और तब 1947 में संयुक्त राष्ट्र में

फिलिस्तिनियों (फिलिस्तीन का धर्म – मुस्लिम समुदाय, अरबी लोग) के देश फिलिस्तिन और इजराइल के लोग (इजराइली ही यहूदी है) के बीच अलग अलग राष्ट्र में बाँटने को लेकर वहां मतदान हुआ और एक बहुत ही महतवपूर्ण जगह फिलिस्तिन (वर्तमान इजराइल) में ही है जिसका नाम येरुशलम है (सारा माजरा इसी येरुशलम को लेकर है) को एक अंतर्राष्ट्रीय शहर बनाया गया इस योजना को यहूदी (वर्तमान इजराइली) पक्ष के नेता ने तो स्वीकार कर लिया था लेकिन फिलिस्तिनियो (मुस्लिम समुदाय, अरबी लोग ) के पक्ष ने इसे ख़ारिज कर दिया मना कर दिया वो इस योजना से सहमत नहीं थे संतुष्ट नहीं थे और ये कानून कभी लागू हो ही नहीं पाया।

तो आज इसी के बारे एक एक चीज को अच्छे से शुरू से समझेंगे आखिर क्यों अभी तक ये मामला

सुलझा नहीं है, और इसमें सबसे बड़ा हाथ UNO का भी है जानेंगे इसके बारे में भी।

फिलिस्तिन में यहूदी (वर्तमान में Israel) लोग कैसे बसे? और आपसी झगड़ा कैसे शुरू हुआ |

फिलिस्तीन कहाँ था, इजराइल पहले फिलिस्तीन ही थी इस पर 100 % कब्ज़ा फिलिस्तिनियो का ही था लेकिन पहले से भी यहूदी लोग

रहते थे। लेकिन उसके community को देश का दर्जा प्राप्त नहीं था और उसकी संख्या कुछ ज्यादा नहीं थी।

लेकिन जब सन् 1920 से 1940 के बीच जब दूसरा विश्व युद्ध हो रहा था तब यूरोप में रह रहे।

यहूदी लोगो को हिटलर चुन चुन कर मार रहे थे ये सब से बचने के लिए ये लोग होलोकॉस्ट से बचने की चाह में भारी संख्या में यहूदी भूमि की तलाश में यहूदी लोग फिलिस्तिन आ पहुंचे थे। जिसको लेकर फिलिस्तिनियो ने आपत्ति भी जताई थी, और न मानने पर फिलिस्तिन और यहूदी के बीच कई बार विवाद भी हुआ और लड़ाई भी हुई। इसके पीछे ब्रिटेन (इंग्लैण्ड) का हाथ है इंग्लैण्ड ने फिलिस्तीन को बाँट दिया और कहा की इसी में इजराइल भी रहेगा और फिलिस्तीन भी रहेगा इंग्लैण्ड ने इसे 1948 में बांटा था फिलिस्तिनियो के देश, फिलिस्तिन और यहुदियों के बीच अलग अलग राष्ट्र में बाँटने को लेकर वहां मतदान भी हुआ। और एक जगह जिसका नाम येरुशलम है इसे अंतर्राष्ट्रीय शहर बनाया गया।

इस योजना को यहूदी पक्ष के नेता ने तो स्वीकृति दे दी लेकिन फिलिस्तिनियो के पक्ष ने इसे ख़ारिज कर दिया मना कर दिया। फिलिस्तीनियों का कहना है कि वे लोग हमेशा से यहीं के मूल निवासी हैं इसलिए इस जगह पर फिलिस्तीनियों का अधिकार है वो कैसे हमसे छीन सकता है, ऐसा वो नहीं होने देंगे, और वो किसी भी स्थिति में यहूदी को ये अधिकार नही दे और फिलिस्तीनियों ने इसे सीधे मना कर दिया और कभी लागू होने ही नहीं दिया। इसके बाद 1948 में अंग्रेज इस इलाके को छोड़कर चले गए।

1948 में UNO ने किस प्रकार फिलिस्तीन और Israel का बंटवारा किया?

इंग्लैण्ड इन लोगो को जान बुझ कर आपस में भिड़ा दे रही थी ताकि इंग्लैण्ड और अमेरिका यहाँ

अपना हथियार बड़े आसानी से बेच सके अपना व्यापार वहां बढ़ा सके 1948 तक वहां कोई देश था ही नहीं

ये फिलिस्तिनियों का था, जब ये मुद्दा इजराइल UNO के पास ले गई UNO Israel को हो सपोर्ट करते थे।

जब ये मामला UNO के पास पहुँच तो क्या हुआ? फिलिस्तनी लोग फिलिस्तीन का राजधानी येरुशलम को मानते हैं।

और ये मुद्दा को Israel ने जानबूझ कर UNO के पास ले गई और UNO ने 14 मई 1948 को इजराइल की स्थपाना कर दी जहाँ पुरे फिलिस्तीनी रहते थे उसे विभाजन कर दो भागो में बाँट दिया। जिसमे 48 % भाग फिलिस्तीन को दिया और 44 % भाग इजराइल को दे दिया और 8 % भाग जो येरुशलम का था वहां की राजधानी थी उसे UNO ने अपने अंडर ले लिया उस पर UNO का अधिकार रहेगा इसे UNO कंट्रोल करेगा। इसमें फिलिस्तिनियों ने कहा इसे हम होने नहीं देंगे और ऐसा हम करने नहीं देंगे ऐसा कभी हो नहीं सकता है नहीं तो युद्ध होगा और विभाजन होते ही युद्ध छिड़ भी गया और जिसमे इजराइल ने इसे अच्छे से कूटा इसके साथ 6 अरब मुस्लिम कंट्री देश और आये थे उसको भी इजराइल ने अच्छे से पिटा।

जंग लड़ रहे थे जंग को जितने के लिए लेकिन इजराइल के यहूदी लोग जंग लड़ लड़ रहे थे अपना अस्तित्व बचाने के लिए उसे पता था कि गर ये जंग हार गया तो उसे यहाँ से निकाला जा सकता है, उसे बंदी बना लिया जायेगा और अपना अस्तित्व खो देगा और उसे मान्यता नहीं मिलेगी। इसमें UNO को क्या जरूरत थी क्या मतलब निकलता है की येरुशलम को अपने कब्जे में रखें।

UNO फिलिस्तिन के येरुशलम को अपने कब्जे में क्यों रखा?

उसका सबसे बड़ा कारण यह है कि येरुशलम 3 पवित्र धर्मो का स्थल है इसाई, यहूदी और मुस्लिम

ईसाईयों का मानना है की उसके ईसा मसीह का जन्म बेथलेहम में हुआ था वो जगह जरुसलम में ही है।

और मुस्लिमों का मक्का और मदीना के बाद तीसरी सबसे बड़ी पवित्र स्थल अलस्का मस्जिद यहीं हैं। इस जगह पर अल्संख्यक यहूदी और बहुसंख्यक में अरब के फिलिस्तिनी बसे थे। 1948 से पहले ये पूरा पिलिस्तान था लेकिन 1948 के बाद इसके सिर्फ 48 % भाग पर ही अधिकार था जो और कुछ सालो बाद 1948 – 1967 के बीच के युद्ध में इसरायली ने कुछ और जगहों पर कब्ज़ा कर लिया। अब फिलिस्तिनी के पास 22 % हिस्सा पर ही अधिकार रह गया था और 2011 के आते आते फिलिस्तीन के पास सिर्फ 12 % हिस्सा ही बच पाया बाकि के जगहों पर अब इजराइल का कब्ज़ा था। जो पहले फिलिस्तिनियों के पास 100 % कब्ज़ा था अब वो 12 % रह गया है।

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फिलिस्तीन का नक्शा

ये आप शुरू के तस्वीर में हरे रंग वाला देख सकते हैं कि पूरा फिलिस्तीन कब्ज़ा था लेकिन समयानुसार यहूदी ने कैसे धीरे धीरे पुरे जगह को अपने कब्जे मने ले लिया और आज सिर्फ 12 % हिस्सा ही फिलिस्तीन के पास है। और उस पर पूरा इजराइल कब्ज़ा कर रहा है उसी के देश को उसी को बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है तो भाई युद्ध तो होगा ही और इजराइल ने अलग अलग नियम बना रखा है। की फिलिस्तीन के लोग हथियार नहीं रख सकते है Air Force नहीं रख सकते हैं आर्मी नहीं रख सकते हैं Navy नहीं रख सकते हैं, और इजराइल सब कुछ रख रखता है, वो पूरा स्वतंत्र है ठीक उसके विपरीत।

Israel पर कौन हमला कर रहा है?

ये हमला Israel से ही गाजा पट्टी/District से हो रही है और ये हमास कर रही है जो वहां की एक आतंकवादी संगठन है। इजराइल के हिसाब से हमास रोकेट मारती है, इजराइल के लोग जानते है ये लोग कमजोर है और जानबूझ कर फिलिस्तिनियों को उकसाते है। और जब वो लड़ने आते है तो उसे बड़े आसानी से मार भगा देती है क्योंकि उसके पास तो हथियार है नहीं है। और उसके बाद उसके जमीन पर कब्ज़ा कर लेती है। और जब भी लड़ाई हुई हर बार फिलिस्तिनों की ही हार हुई क्योंकि इजराइल के पास सारा हथियार है। मुद्दा क्या है तो मुस्लिमो का 3 पवित्र धर्म स्थल है मक्का, मदीना और अलस्का मस्जिद जो मुस्लिमो का तीसरा पवित्र धेम स्थल है मक्का मदीना सऊदी अरब में है और अलस्का मस्जिद येरुशलम में हैं।

विवाद कहाँ से शुरू होती है? येरुसलम न तो इजराइल के अधिकार में है न ही फिलिस्तिनियों के अधिकार में,

इस पर UNO का अधिकार है और UNO सपोर्ट करता है इजराइल का उसके इशारे पर काम करती है।

(ये जो आप छोटा सा मिश्र से सटा पीले रंग का देख रहें है गाजा पट्टी या District वो फिलिस्तीन का ही एक हिस्सा है। ये हमेशा जोश में रहता है हमला करने के लिए तैयार बैठा रहता है बस इसको मौका चाहिए इजराइल पर हमला करने के लिए)

येरुशलम जो UNO के अंडर आता है उसके पास एक जगह है जिसे सेख जर्राह है और इजराइल के सुप्रीम कोर्ट ने कहा की ये जो यहाँ पर फिलिस्तीनी रहते हैं इसको यहाँ से खाली करवाओ ये जगह यहुदियो का है। इंग्लैण्ड ने 150 साल पहले यहुदियो कहा की यहां हम यहुदियो को बसायेंगे और वो लोग ने यहाँ जमीन खरीदना चालू कर दिया था। और महंगे दामो पर उन लोगो ने जमीन को ख़रीदा था अरब वालो से यहूदी ने ख़रीदा था और उसके पास कागज भी है। 100 साल पहले के आसपास Israel ने महंगे दामों पर अरब वालो से ही ख़रीदा था और अब ये वापस मांग रहे।

इजराइल पर हमला क्यों किया गया?

शाह जरहा से कुछ दुरी पर है अलस्का मस्जिद और जब फ्राइडे की नमाज रमजान में अदा करने के लिए

जब सब वहां इकट्ठा हुई थी इजराइली ख़ुफ़िया को एजेंसी पता था की जब शाह जरहा को खाली

कराया जा रहा है तो जरुर कुछ बड़ा विवाद हो सकता है। जिसके लिए वहां इन्होने अपना सिक्यूरिटी गार्ड को लगा दिया था जिसको लेकर वहां पर कुछ लोगों ने सवाल खड़ा कर दिया दोनों में बहस शुरू हुई और फिर ये विवाद आगे बढ़ा और वहां पर कुछ लोग जो थे वो पत्थर चलाने लगा और इसके जवाब में फ़ौज नें मार दिया बम ग्रेनेट जिसको लेकर चारो तरह उस क्षेत्र में दहशत फ़ैल गया यहाँ पर भी इजराइल ही भारी पड़ा। और कुछ ही समय ये विवाद बहुत बड़ा विवाद बन गया और वहां तुरंत फ़ौज ने मस्जिद में ऐसे ही घुस गए और जिसमे पूरी दुनिया में विरोध होने लगी। अब Israel पर इंटरनेशनल दबाव इतना ज्यादा आने लगा और UNO ने कहा की वो क्षेत्र मेरे अंडर में आता है, तो तुम वहां किसके परमिशन से घुस गए हो।

इजराइल में मुस्लिम आबादी कितनी है?

Israel में करीब 14 % आबादी मुस्लिम की है जिसमे से करीब 15 से 17 लाख मुस्लिम लोग रहते हैं।

और इजराइल की जनसंख्या करीब 1 करोड़ के आसपास है। अभी वहां पर किसी की सरकार नहीं ही बनी है।

कोरोना को लेकर सब कैंसिल है।

फिलिस्तीनी अब पुराना वाला ही 48 % क्षेत्र पर अधिकार मांग रहा है

फिलिस्तीनी अब पुराना वाला ही 48 % क्षेत्र पर अधिकार मांग रहा है

(ये तस्वीर में आप देख सकते है जब 1947 में 48 % भाग हिस्सा फिलिस्तीनी को दिया था।)

और अब फिलिस्तीनी लोगों का कहना है वो पुराना वाला ही अधिकार वापस दिला दो जो 48 % हिस्सा था। लेकिन इसराइल का कहना है की नही, फिर तुमने हमारे साथ इससे पहले युद्ध लड़ने की कोशिश क्यों की तुम्हे क्या लगा था की तुम खत्म करके यहाँ पूरा कब्ज़ा कर लोगो और साथ में दूसरे मुस्लिम कंट्री को भी ले आय थे ताकि मुझे यहां से उखाड़ कर उजार फेंको और जब हार गए तो कहते वापस दे दो पुराना वाला ही। ये अब संभव नहीं है। अब ये युद्ध आगे ताज जाएगा ऐसा इजराइल का कहना है। फिलिस्तीन अब तो राज्य हो चुकी है एक western bank और दूसरा गाजा पट्टी या फिर गाजा District कह सकते हैं। western bank दूसरा गाजा पट्टी या फिर गाजा District ये दोनों से मिलकर बना है फिलिस्तीन।

अब इजराइल कह रहा है की जो गाजा पट्टी/District है उसको भी जल्द निपटा देंगे और ये जो

western bank राज्य है उसे अरब देशो का संमर्थन है ये थोड़ा नर्म रहते है हौ और थोड़ा शांति स्वाभाव के है और शांति तरीके से अपनी मांग को रखते है ज्यादा कुछ उल्टा सीधा हरकते नहीं करते है लेकिन गाजा District वाले सीधे रोकेट दाग देते हैं गाजा District को ईरान का समर्थन है और western bank को अरब देशो का। और यहीं गाजा District में एक आतंकी संगठन है जिसका नाम हमास है, जिसका कहना है इजराइली ही हमेशा हम लोगों पर जुल्म करता है बम फेंकता है और कब्ज़ा करते जाता है तो हमलोग भी हमला करेंगे ये गाजा पट्टी वाले Qassam रॉकेट से हमला करते है।

हमास और इजराइल के पास हथियार

पहले इसके पास ज्यादा रेंज वाली मिसाइले नहीं थी लेकिन अब इसके पास ज्यादा रेंज वाली मिसाइले है।

जो पूरे इजराइल पर हमला करने की क्षमता है, और इस बार थोडा बहुत नुकसान हो ही गया क्योंकि

इस बार हमास वालो ने बहुत अधिक मात्रा में मिसाइलो से हमला किया था लेकिन इजराइल ने 90 % सी ज्यादा मिसाइलो को हवा में ही मार गिराया था। इजराइल के पास मिसाइल डिफेंस system है जिसे Iron Dome shield कहते है जो छोटे दूर के किसी भी मिसाइल को हवा में ही मार के गिरा देती है। 2 – 4 मिसाइल ही इजराइल पर गिरी जिसमे थोड़ा बहुत नुकसान हुआ और करीब 7 से 10 लोगो की मरने की खबर है। जिसमे से एक भारतीय मूल की महिला जो वहां नर्स का काम करती थी वो इस हमले में मारी गई। लड़ाई उनके बीच थी बेवजह इसमें बेकसूर लोग मारे गए, और जब Israel ने मिसाइल दागना शुरू किया तो हमास के ठिकाने को तो नष्ट किया ही लेकिन फिलिस्तिनियों का कहना है कि उसके हमले से उसके करीब 70 लोग मारे गए।

इजराइल से अरब देश वाले बहुत नफरत करते है पाकिस्तान वालो ने तो अपने पासपोर्ट में लिखते है की वो

इजराइल नहीं जा सकते है क्योंकि वो इजराइल को देश ही नहीं मानते हैं।

इजराइली और गाजा पट्टी हमले से 200 से अधिक फलस्तीनी और 20 इसरायली पुलिसकर्मी घायल है।

क्या भारत इजराइल का समर्थन करेगी?

भरता का इजराइल का समर्थन इसलिए नहीं कर रही है क्योंकि इजराइल ने वहां फिलिस्तिनियों का जमीन कब्ज़ा कर बैठा है। अगर भारत इजराइल का समर्थन कर दिया तो पाकिस्तान भी कहेगा की हमने जो जमीन कब्ज़ा किया है वो मेरा होना चाहिए और उधर से चीन भी आ जायेगा और कहेगा मैंने जो जमीन कब्ज़ा किया है वो मेरा होना चाहिए। जिस वजह से भारत इजराइल का समर्थन नहीं कर सकती है।

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Anshuman Choudhary

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