Bio Weapon corona का चाइना कर रहा था टेस्ट? | अमेरिकी CIA ने किया खुलासा

चीन की करतूत आने वाली है अब सामने एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना है एक Bio Weapon मिले पुख्ता सबूत।

अमेरिका के Intelligence एजेंसी के द्वारा कुछ सबूत इकठ्ठे किये गए है जिसमे बताया गया है की

चाइना इस वायरस पर साल 2015 से ही काम कर रहा था

जब से कोरोना वायरस दुनिया में आया है और जो सबसे पहले चाइना में पाया गया था तब से

चाइना सरकार पर ऊँगली उठ रही है लेकिन चाइना सरकार हर बार इंकार करती आ रही है।

कुछ लोगों को अब तक सिर्फ लग रहा था की कोरोना एक प्राकृतिक (Natural) वायरस है। और कुछ लोगो को लग रहा था की इस वायरस को चाइना ने ही इजात किया अभी तक सब सिर्फ एक अंदाजा लगा रहे थे। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की कोरोना चाइना का बायोलॉजिकल Weapon है जिसे तीसरे विश्व युद्ध में इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है। और जो अभी चोरी छुपे चाइना ने जो लगभग पूरी दुनिया में कोरोना वायरस को फैलाया है, ये सिर्फ एक टेस्टिंग थी। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जब इसका इस्तेमाल युद्ध में किया जायेगा इसे दुश्मन के खेमे में किसी माध्यम से छोड़ा जायेगा जो वायरस दिखता नहीं है उससे हम या फिर कोई और कैसे बच सकता है। इसे आसानी से हवा में छोड़ा जा सकता है, इसे पानी के माध्यम से आसानी से छोड़ा जा सकता है।

और ये कब हमारे शरीर में प्रवेश कर जायेगा उसका पता चल पाना मुश्किल है।

ये Bio Weapon या बायोलॉजिकल जैविक हथियार क्या होता है?

बायोलॉजिकल जैविक हथियार या Bio Weapon एक ऐसा हथियार है जिसका इस्तेमाल लोगो को बीमार करके किया जाता है।

और इसका सही समय पर इलाज न मिलने की स्थिति में उस इन्सान की मृत्यु हो जाती है, और ऐसे जैविक हथियार का इलाज तुरंत ढूँढ पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। ये जैविक हथियार या Bio Weapon बहुत ही सूक्ष्म होते हैं यानि इतने छोटे की इसे हम अपने नंगे आँखों से नहीं देख सकते हैं। आपने 8वीं – 10वीं कक्षा में बायोलॉजी का पाठ में जरुर पड़ा होगा ये तो हर किसी ने पढ़ा होगा जिस जिस ने भी स्कूल गया होगा। उसमे आपने छोटे छोटे बैक्टैरिया के बारे मेंही पढ़ा होगा जो हमारे शरीर के लिए कुछ हानिकारक बताया गया था। तो कुछ हमारे शरीर के फायदा के लिए, दही के बैक्टेरिया लैक्टोबैसिलस के बारे कुछ लोगों ने सुना ही होगा और कुछ लोगों ने तो देखा भी होगा।

ये बैक्टेरिया दही जमने में मदद करती है और इसे हम खाते भी हैं जो हमारे लिए लाभदायक होता है।

कुछ इसी तरह जैविक हथियार भी होता है सूक्ष्म एकदम छोटे जिसे हम देख ही नहीं सकते है।

ये हवा में होता है, ये पानी में होता है हमारे वायुमंडल में भी होता है, ये हमारे शरीर में

कब प्रवेश कर जाता है इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है,

जैविक हथियार पर बहुत पहले से कई देश काम कर रहा है जिसमे चीन, अमेरिका, इजराइल ब्रिटेन, जर्मनी, साउथ अफ्रीका

ताईवान कनाडा, जापान, फ्रांस आदि और कई देश चोरी छुपे रिसर्च कर रहा है।

Bio Weapon बायोलॉजिकल जैविक हथियार का इतिहास पुराना है

इससे पहले भी जैविक हथियार के रूप में जहर का इस्तेमाल किया जाता था, जिसमे दुश्मन के कुएं में जहर डाल दिए करते थे। जिसके बाद उस क्षेत्र के लोग पानी पीकर मर जाते थे। 2nd world war में भी इसका इस्तेमाल करने का जिक्र हुआ है, जिसमे जापान ने चीन पर जैविक हथियार से हमला किया था, हो सकता है उसी समय से ये लोग उस समय से इस चीज पर रिसर्च कर रहे हों। एक बार जापान ने रूस के पानी के पाइप लाइन में टाईफाइड के बैक्टेरिया छोड़ दिया था, जिससे रूस के लोग बीमार पड़ने लगे थे।

1980 के दशक में इराक ने ईरान पर हमला किया था जिसमे केमिकल गैस का इस्तेमाल किया था।

साल 2013 में सीरिया में भी केमिकल के द्वारा हमला किया गया जिसमे हजार लोगों से ज्यादा लोगो की जान गई थी।

साल 2014 से लेकर साल 2017 के बीच सीरिया में कई केमिकल हमला हुए जिसमे अमेरिका ने भी

रूस पर भी बहुत सारे इल्जाम लगाये गए 2017 में अफगानिस्तान में भी केमिकल हमला हुआ।

CIA का खुलासा | चाइना Bio Weapon पर 2015 से काम कर रही थी?

अब दुनिया के सामने CIA ने एक रिपोर्ट रखा है जिसमे पुख्ता सबूत है, की कोरोना एक चाइनीज बायोलॉजिकल weapon है। जिसका चाइना टेस्टिंग कर रहा था, और bio weapon पर चाइना 2015 से ही रिसर्च कर रहा था ये सिर्फ टेस्टिंग कर रहा था। सोचो गर इसने पूरी तरह से इसे फैला दिया तो तब क्या होगा ये तीसरे विश्व युद्ध की तैयारी कर रहा है जिसमे फ़ौज की जरुरत नहीं होती है किसी को लड़ने की आवश्यकता नहीं होती है ज्यादा खर्च भी नहीं करना पड़ता है। बस दुश्मन के खेमे किसी तरह वायरस को फैला दो, वायरस को किस तरह से फैलाया जाना चाहिए। चाइना इस पर भी रिसर्च कर चुका है कौन सा माध्यम वायरस को फ़ैलाने के लिए सबसे ज्यादा कामगार होगा सब इन्होंने पहले ही रिसर्च कर लिया है।

इस वायरस को ज्यादा धुप में छोड़ा नहीं जा सकता है क्योंकि इससे इसका असर कम हो जाता है।

इसे ज्यादा तेज हवा में भी नहीं छोड़ा जा सकता है, जब हवा तेज न चल रहा हो एकदम मध्यम हो तब इसे हवा के माध्यम से छोड़ा जा सकता है, जब बर्फ बारी हो रही हो तब भी इसे छोड़ने से ज्यादा असर नहीं होगा। इसे पानी के माध्यम से छोड़ा जा सकता है

आखिर कोरोना वायरस को अंत के 2019 में ही फैलाना के पीछे क्या वजह थी? इसको अच्छे से समझने के लिए हमें कोरोना के आने के कुछ महीने पीछे जाना पड़ेगा तब आप अच्छे से समझ पायेंगे।

चाइना ने खास करके दो देशो को निशाना क्यों बनाया? पूरा रिपोर्ट

बात कोरोना आने से 6 – 7 महीने पहले की करते हैं? यानि मई – जून 2019 के महीने की जब चाइना के राष्ट्रपति Xi Jinping और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल ट्रम्प के बीच आपसी विवाद चल रहा था। आपस में बातों बातों में लड़ रहे थे, खूब बहस हो रहीं थी, जुबानी जंग हो रही थी और दोनों एक दुसरे से गाली गलौज और युद्ध छेड़ने तक की बात कर रहे थे। कुछ देशो को लगने लगा था की अब चाइना और अमेरिका आपस कभी भी लड़ सकते हैं। नवम्बर 2019 में कोरोना आता है जुबानी जंग फिर भी चालू रहती हैं अब आता है 2020 कोरोना अभी धीरे धीरे अपना पैर पसार रहा होता है। उस वक्त तक भारत की स्थिति ठीक थी उस समय कुछ दुसरे देश की हालत ख़राब थी जैसे यूरोप इटली ब्राजील, इंग्लैण्ड,ऑस्ट्रेलिया, और अमेरिका कुछ कुछ में ठीक थी।

भारत चीन सीमा विवाद

2020 के बाद भारत और चीन के बीच लद्दाख के सीमा को लेकर विवाद बढ़ जाती है,

जिसमे चीन के सेना लदाख में घुसने की कोशिश करता है और भारत के अंदर आने लगती है।

और जमीन कब्ज़ा करने की कोशिश करने लगता है, इससे पहले अमेरिका से विवाद होता है।

और उसके बाद अब भारत से विवाद शुरू हो जाता है, चाइना में उस वक्त कोरोना को लेकर लॉक डाउन लगाने की तैयारी हो रही थी, और उसी समय चीन सीमा के द्वारा दखलंदाजी करने लगा था लदाख सीमा के जरिये भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश कर रहा था। ये विवाद बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी, शायद कोरोना नहीं आता तो अब तक भारत चीन सीमा में लड़ाई हो चुकी होती लकिन भारत और चीन में लड़ाई होने की आशंका हो रही थी ये हो सकता है चाइना सरकार की एक किसी तरह की चाल होगी और उसके बाद धीरे धीरे अमेरिका में कोरोना फैलता है और उसके कुछ दिन भारत में मार्च में कोरोना जोड़ पकड़ लेता है जो एक संयोग सा लगता है और उसके बाद भारत में लॉक डाउन की तैयारी शुरू हो जाती है।

दोनों देशो से अनबन होती है और बीच में ये न जाने कहाँ से ये कोरोना बीमारी आ जाता है।

और बीच आकर में टांग अड़ा देता है जिससे दोनों देशो के साथ जो जंग होने की संभावना थी

दोनों देश जंग भूलकर चाइनीज कोरोना से जंग लड़ने लगा

वो कोरोना के चक्कर में दोनों देश भूल जाता है कोरोना से जंग लड़ने लगता है अब रह जाता है।

सिर्फ कोरोना का मुद्दा और कोरोना का बाप कौन है यानि ये कहाँ से पैदा हुआ मतलब इसे सबसे पहले कहाँ पाया गया तो ये पैदा हुआ बच्चा भी बता देगा सीधा सा जबाव चाइना, जिसका कोई product एक समय चलता नहीं था। लेकिन ये छोटा सा वायरस जो साला दिखता भी नहीं वो पूरी दुनिया में दो सालो से टिका हुआ और अपना वर्चस्व कायम रखा है और अपना वंश बढाता जा रहा है। ये वायरस जो चाइना के वुहान शहर के हुबई प्रांत के virology लैब से निकला जहाँ पर इस तरह के रिसर्च किया जाता है। जो चमगादड़ से निकला और उस समय भी चाइना पर इस वायरस की उत्पत्ति की का इल्जाम लगा लेकिन कोई सबूत न होने की वजह से साबित नहीं हो पाया था।

और ऐसी धीरे धीरे वक्त बीतता है बाकि देशो के बाद एक देश निकलता है जहाँ कोरोना का

सबसे ज्यादा केस निकलता है अमेरिका, उस समय समय डोनल ट्रम्प भारत दौरे पर भी आये थे

और उस वक्त लघभग देश में कोरोना फ़ैल चुक था लेकिन जब डोनल ट्रम्प भारत दौरे पर आया था।

उस वक्त अमेरिका में कोरोना का कुछ असर नहीं था।

अमेरिका और भारत में कोरोना ( Bio Weapon) का असर

और उस दौरे के बाद अमेरिका पर कोरोना ने तबाही मच दिया और सबसे ज्यादा कोरोना के केस अमेरिका में हो गया। और सबसे ज्यादा मौत अमेरिका में ही हुई और धीर धीरे ऐसे ही वक्त बीतता है, और उसके बाद भारत में प्रतिदिन 3 लाख से 4 लाख नए केस सामने आ रहे थे, और दो देश ऐसे बन जाते हैं जहाँ कोरोना के सबसे ज्यादा केस सामने आते हैं। आज की तारीख में देखा जाये तो पूरी दुनिया में करीब 16 से 17 करोड़ के बीच कुल संक्रमित हुए, जिनमे से करीब 33 लाख लोग मारे गए। अमेरिका में 3.33 करोड़ भारत में 2.30 करोड़ सिर्फ दो देशो में करीब 6 करोड़ कोरोना के केस आये। भारत और अमेरिका में सिर्फ 5.75 लाख मौत और भारत में 2.50 लाख मौत हुई जो अब तक की सबसे ज्यादा है।

एक चीज कुछ कुछ लोगों को खटक रही है कि जिस शहर से ये कोरोना नवम्बर 2019 में निकला चाइना से वहां की क्या हालात है। चाइना ने तो बड़े आराम से 7 से 8 महोने में कोरोना पर कण्ट्रोल कर लिया ये कैसे संभव हो सकता है। या तो उसके पास इसकी दवा थी कुछ तो उसके पास जरुर थी ऐसी कैसे संभव हो सकता है, चीन की सरकारी आंकड़े के अनुसार चीन में सिर्फ 90 हजार ही कोरोना के मरीज पाए गए जिसमे से 85 हजार ठीक हो गए और सिर्फ 4 से 5 हजार लोग ही इस कोरोना से मारे गए।

ये तीन देश के आंकड़े के हिसाब से आपको क्या अंदाजा लगता है आपको दिमाग में क्या विचार आता है

कोरोना से सबसे ज्यादा नुकसान भारत और अमेरिका को हुआ चाइना की ज्यादा दुश्मनी भी इन्ही दो देशों से हैं।

बात आपको भी थोड़ा थोड़ा स्पष्ट होता दिख रहा होगा और जहां से ये कोरोना निकला वहां कुछ नहीं हुआ।

अब तो वहां लोग बगैर मास्क भी घुमते है। वहां तो अब कोई कोरोना केस आ ही नहीं रहा है।

ये कैसे हो सकता है जो जन्मदाता है उसी देश को कोरोना कैसे भूल सकता है जिसका माई बाप दादा परदादा

नाना नानी सब चाइना है तो ये वायरस अनजान देशो को अपना घर दूसरे देश में क्यों बसाया।

क्या ये साजिश थी उस यहाँ बसाने की बाकि देश में दूसरी तीसरी लहर चल रही है लेकिन चाइना तो लहरों के बीच मजे ले रहा है शक तो पहले भी था अब भी है सबूत न होने की वजह से उसे कुछ नहीं कर सकते है, और ये शक अब और बढ़ गया। देखा जाये तो चाइना सबसे ज्यादा सामान अपना अमेरिका और भारत में ही निर्यात करता हैं, ऐसा में गर ऐसी लड़ाई होती रहेगी तो अमेरिका तो चाइना के साथ अपना कारोबार बंद क़र देगा और कुछ हद तक बंद भी हो गई थी। क्या ये साजिश कई देशो की है अमीरों लोगो की है गरीबो के साथ साथ नाकाम लोगो को हटाने की है।

सच क्या है कोई बताता क्यों नहीं है, देर है पर अंधेर नहीं भले लोग आज मर रहें हैं

और हो सकता है ये हालात अभी कुछ सालो तक ऐसा ही चलते रहे।

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Anshuman Choudhary

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