Chhota Rajan biography, family, wife | dawood ibrahim story | Bada Rajan

Chhota Rajan का जीवन परिचय

Chhota Rajan का जीवन परिचय

Chhota Rajan का जीवन परिचय

आज मैं आपको डॉन Chhota Rajan के बारे में बताऊंगा कि आखिर वो कैसे डॉन दाउद इब्राहीम से मिला।

दाउद इब्राहीम के D कम्पनी में शामिल हुआ उसका राईट हैण्ड बना और दाउद इब्राहीम के ही गैंग के कुछ गंगस्टर इससे नाखुश होकर छोटा राजन और दाउद इब्राहीम के बीच दुश्मनी करा दी। जिससे छोटा राजन कई सालो तक दाउद इब्राहीम के आदमियों से बचता रहा और कैसे छोटा राजन को मुम्बई पुलिस पकड़ती है INTERPOL और इंडोनेशिया अथॉरिटी की मदद से। आखिर डॉन छोटा राजन छोटा राजन कैसे बना, बड़ा राजन कौन था, दाउद इब्राहीम से इनकी दोस्ती कैसे हुई। और आज के वक्त में डॉन छोटा राजन कहाँ है और दाउद इब्राहीम कहाँ हैं, आज जानेंगे शुरू से लेकर अंत तक की स्टोरी कि आखिर कैसे बड़ा राजन के गैंग में शामिल हुआ फिर दाउद इब्राहीम के गैंग में शामिल हुआ और बाद में दाउद इब्राहीम से अलग होने बाद अपनी गैंग बनाया।

छोटा राजन का जन्म और परिवार (Chhota Rajan Birth & Family)

तो छोटा राजन का जन्म 13 जनवरी 1960 में मुंबई के चेम्बूर के तिलक नगर बस्ती में हुआ

छोटा राजन का असली नाम राजेंद्र सदाशिव निखलजे है। छोटा राजन नाम तो ये बड़ा राजन के गैंग में शामिल होने के बाद का नाम है, इससे पहले इनको इनके इलाके और बस्ती के लोग नाना या सेठ कहकर भी बुलाते थे, छोटा राजन मुम्बई के सिनेमाघरों के बाहर ब्लैक में टिकटे बेचा करते थे उस वक्त इनकी उम्र मात्र 10 साल थी। आप अंदाजा लगा सकते है कि इतनी छोटी सी उम्र में टिकटे ब्लैक करना कितनी बड़ी बात है। और जब उसे पुलिस पकड़ती थी तो पुलिस पर ही उलटे हमला कर देती थी, उससे लड़ाई हो जाती थी।

छोटा राजन कैसे छोटा राजन बना? डॉन बड़ा राजन की स्टोरी?

छोटा राजन के बारे में जानने से पहले आपको बड़ा राजन की छोटी सी स्टोरी सुननी पड़ेगी तभी आपको

बढ़िया से Chhota Rajan के में अच्छे से जान पायेंगे। क्योंकि छोटा राजन बनने के पीछे बड़ा राजन का

बड़ा हाथ है ये नहीं होता तो शायद कभी ये दाउद इब्राहीम से मिल ही नहीं पाते। तो बड़ा राजन को डॉन की दुनिया में बड़ा राजन के नाम से जाना जाता था लेकिन ऐसे इन्हें राजा नायर के नाम से जानते थे। ये मुंबई के चेम्बूर के इलाका का रहने वाला था, बड़ा राजन को एक लड़की से बेहद मोहब्बत हो गई। और आप जानते है की इश्क में कोई भी कुछ करने को तैयार रहते हैं, तो इसकी गर्ल फ्रेंड भी बहुत खर्चीली थी, तो बड़ा राजन पेशे से एक दर्जी था उससे तो उसके डिमांड को पूरा नहीं किया जा सकता था।तो उस वक्त अपनी गर्ल फ्रेंड की डिमांड पूरा करने के चक्कर में वह गलत रास्ते पर चल गया।और उसकी डिमांड को करने के लिए एक दिन वह चोरी करता है वह एक टाइप राइटर चोरी करता है।

और बेच करके उसकी डिमांड को पूरा भी करता है, लेकिन इस चोरी में बड़ा राजन पकड़ा भी जाता है।

जेल भी जाना पड़ जाता है और कई दिनों तक जेल में ही रहता है और उसी दौरान जेल में

बड़ा राजन का छोटे मोटे और बड़े क्रिमनल से मुलाकत होती है और वहीं से उसके दिमाग में क्राइम की

दुनिया में कदम रखने का ख्याल आता है और जेल से बाहर आते ही उसने चेम्बूर में वहां के लोकल

लड़को को इकठ्ठा कर अपनी एक गैंग बनाता है और उस गैंग का नाम गोल्डन गैंग रखता है, उस समय हाकी डंडा बोतल रोड पत्थर Tubelight चाकू का ज्यादा इस्तेमाल होता था, बन्दुक वैगरह का कम।

बड़ा राजन (राजा नायर) का गैंग? दाउद इब्राहीम का गैंग? पठान brother’s का गैंग?

बड़ा राजन (राजा नायर) का गैंग? दाउद इब्राहीम का गैंग? पठान brother's का गैंग?

जब बड़ा राजन अपनी गोल्डन गैंग शुरू करता है तो उस वक्त मुम्बई में बहुत से गैंग हुआ करते थे।

और उस समय सबका एक अलग अलग इलाका बटा होता था यानि की उस इलाके में कोई दूसरा गैंग काम नहीं कर सकता है यानि उसके एरिया में घुसकर कोई दूसरा गैंग वसूली, धमकाना लूटपाट आदि नहीं कर सकता था। उस वक्त जो गैंग सबसे उपर था वो था पठान, brother’s (Pathan brother’s) इसका कब्ज़ा कई इलाकों पर था उसके बाद और भी कई गैंग थे, एक अरुण गब्ली था उसका अलग इलाके पर कब्ज़ा था और एक था करीम लाला और एक था हाजिम मस्तान गैंग सब का अलग अलग इलाके बटा हुआ था फिर एक दाउद इब्राहीम काश्कर का गैंग था जो भी धीरे धीरे उभर ही रहा था जो आगे चलकर एक बड़ा गैंग बना जिसका ब्रांच दुबई में बनाया गया। और बड़ा राजन अपना इलाका जो बनाया था वो था चेम्बूर और उसी इलाके में एक अब्दुल कुंजू रहता था।

उसे कालिया भी कहते थे एक तरह का वो चेम्बूर का दादा भी था बड़ा राजन ने उसके भी

बड़े कारनामे सुने थे तो उसको भी अपनी गैंग में शामिल कर लेता है। और उसके बाद शुरू वसूली करना, धमकी देना आदि बड़े बड़े लोगों से बिल्डर्स आदि से, शराब की तस्करी शुरू कर दी, बड़ा राजन धीरे धीरे बड़ा बनता गया। इसी बीच स्टोरी में एक बड़ा ट्विस्ट/चेंज आता है, जिस गर्लफ्रेंड के खातिर बड़ा राजन क्राइम की दुनिया में आया था। जिसकी ख्वाइशों को पूरा करने के लिए वो बड़ा राजन ने पहली बार चोरी की थी वही लड़की उसी के गैंग के एक मेम्बर अब्दुल कुंजू उर्सेफ़ कालिया से setting हो जाती है और उससे शादी भी कर लेती है। और अब्दुल कुंजू बड़ा राजन की नजरो से ओझल/गायब हो जाता है।

बड़ा राजन और अब्दुल कुंजू की दुश्मनी?

जब अब्दुल कुंजू बड़ा राजन की प्रेमिका ले के भागी तो स्वाभाविक है की दोनों के बीच दुश्मनी होगी।

और ऐसा ही हुआ, बड़ा राजन अब उसके पीछे लग गया जहाँ देखता गोलियां चलनी शुरू हो जाती थी लेकिन

अब्दुल कुंजू हर बार बच जाता, अब्दुल कुंजू को लगा कि गर वो ऐसे ही भागता रहा तो कब तक भाग पायेगा तो ये सब बचने और बड़ा राजन को ही रास्ता से हटाने के लिए अब्दुल कुंजू दूसरी गैंग में चला गया। और उसे डर भी था की किसी भी वक्त बड़ा राजन उसे मार सकता है तो उसने उसी का ठिकाना लगाने के लिए पठान brother’s गैंग्स से हाथ मिला लिया। और उस वक्त पठान brother’s गैंग शक्तिशाली था उस इलाके में, तो पठान brother’s को भो बड़ा राजन से थोड़ी बहुत दुश्मनी भी थी। क्योंकि वो उसके इलाके में आकर वसूली किया करते थे, तो इससे वो थोड़ा परेशान रहते थे। सन् 1982 में मुंबई के एक कोर्ट में जब बड़ा राजन का किसी केस का पेशिगी था, तो उसी पेशी में बड़ा राजन को मारने का प्लान बनाया गया, पठान brother’s के द्वारा।

तो उसके लिए एक शूटर तैयार किया गया उसे मारने के लिए जो चंद्रशेखर नाम का एक शूटर था जो

अब्दुल कुंजू का जान पहचान वाला ही था और उसके ऊपर पठान brother’s का भी हाथ था। तो उस दिन

वो शूटर 1982 में नौसैनिक के ड्रेस में कोर्ट में जाता हैं, और उसके हाथ में एक मोटी सी किताब

होती है सिर्फ दिखावे के लिए दरअसल वो किताब अंदर से खोखला होता है और उसके अंदर एक बन्दुक रखी थी, जिससे लोगो को शक भी नहीं होता है, उस वक्त ऐसे रियल में होते थे। और शूटर कोर्ट में बड़ा राजन का इन्तेजार कर रहा था।

बड़ा राजन का मर्डर कैसे होता है? उसके बाद Chhota Rajan का उदय कैसे होता है?

जब बड़ा राजन के किसी केस की पेशगी थी तो जब वो कोर्ट पहुँचता है तो वैसे ही उस पर

शूटर चंद्रशेखर अपने किताब से बन्दुक निकालकर सीधे बगैर गलती किये बड़ा राजन पर गोली चला देता है।

और बड़ा राजन की बड़ी दर्दनाक मौत वहीं हो जाती है, और उस समय छोटा राजन चेम्बूर में ही छोटे मोटे का काम कर रहा था टिकट ब्लैक में बेंचना लोगो को धमकाना और वो बड़ा राजन का गैंग भी ज्वाइन किया हुआ था। छोटा राजन के ऐसे कामो से उसके परिवार वाले हमेशा नाराज रहते थे, खास करके उनके पिताजी क्योंकि वो एक शरीफ इंसान थे और एक सीधे साधे नौकरीपेशा वाले आदमी थे। लेकिन छोटा राजन को जरा सा भी फर्क नही पड़ता था, तो उस वक्त बड़ा राजन का गैंग धीरे धीरे ऊपर जा रही थी, और Chhota Rajan बड़ा राजन के करीब पहुँच चुके थे। और उसका राईट हैण्ड भी बन जाता है, 1982 में बड़ा राजन का मर्डर हो जाने के बाद राजेंद्र सदाशिव निखलजे उर्फ़ छोटा राजन उसका बदला लेने का ठानता है।

यहाँ से जन्म होता है छोटा राजन का, पता तो चल ही जाता है की इसके पीछे अब्दुल कुंजू

और पठान brother’s का हाथ है। और उसको मारने का प्लान बनाया कई बार हमला भी किया लेकिन वो बच जाता। जब एक बार अब्दुल कुंजू अस्पताल में भर्ती था तब छोटा राजन ने उसे अस्पताल में मारने का प्लान बनाया और छोटा राजन ने अपने आदमी को उस अस्पताल में पेशेंट बना के हाथ में नकली प्लास्टर लगा के फ़िल्मी स्टाइल में उसके आदमी उस अस्पताल में गया और वहां अब्दुल कुंजू को देखते ही गोली चला देता है लेकिन वो बच जाता है।

बड़ा राजन की जगह पर Chhota Rajan कैसे आता है?

छोटा राजन ऐसे है ही अब्दुल कुंजू पर कई हमले करता है लेकिन वो हर दफा बच जाता था।

और इस बदले की आग में अब्दुल कुंजू पर बार बार हमला करना और बच जाना, ये चलता रहा

और ऐसे ही धीरे धीरे राजेंद्र सदाशिव निखलजे (छोटा राजन) गैंग की कमान संभाल लेता है और और इस तरह

बड़ा राजन की जगह छोटा राजन का जन्म होता है। और पहला मकसद था अपने बॉस का बदला लेना चूँकि अब्दुल कुंजू के ऊपर पठान brother’s का हाथ था और पठान brothers की दुश्मनी उस वक्त दाउद इब्राहीम की गैंग से हो चुकी थी। क्योंकि दाउद इब्राहीम की गैंग बड़ी तेजी से ऊपर जा रही थी, जिसको देखकर पठान brother’s जलने लगा था, और बाद में इनके बीच कई गैंगवार भी हुआ। लेकिन बीच में हाजी मस्तान आकर दोनों के बीच सुलह करा देते थे और कसमे भी खिलाई जाती थी की वो आपस में कभी नहीं लड़ेंगे लेकिन ऐसा नहीं होता है ये दुश्मनी ऐसे ही आगे भी चलती रहती है।

छोटा राजन की मुलकात दाउद इब्राहीम से कैसे होती है?

छोटा राजन की मुलकात दाउद इब्राहीम से कैसे होती है?

जब दाउद दाउद इब्राहीम को पता चलता है कि कोई Chhota Rajan नाम का लड़का कोई गैंग का है,

जो अपने बॉस की मौत का बदला लेने के लिए अब्दुल कुंजू उर्फ़ कालिया को मारने की फ़िराक में है। और दाउद इब्राहीम को ये भी पता चला कि छोटा राजन किस तरह अस्पताल में हाथ में नकली प्लास्टर लगाकर मारने जाना एक हिम्मत वाला और शातिर दिमाग वाला ही कर सकता है। और इसी घटना से प्रेरित होकर दाउद इब्राहीम छोटा राजन से मिलना चाहता था तो छोटा राजन के नीचे काम करने वाले लोग दाउद इब्राहीम और छोटा राजन की मुलाकात कराती है। और दाउद इब्राहीम छोटा राजन को अपने गैंग में शामिल कर लेता है अब दोनों का मकसद एक हो जाता है क्योंकि छोटा राजन जिसको मारना चाहता है अब्दुल कुंजू को उसके ऊपर पठान brother’s का ही हाथ है और उससे दाउद इब्राहीम की दुश्मनी थी।

और दाउद इब्राहीम ने छोटा राजन से वायदा भी किया की अब्दुल कुंजू को मारने में उसकी मदद करेगी।

और मदद किया भी, जब एक दिन पता चला की अब्दुल कुंजू चेम्बूर के मैदान में लड़को के साथ

क्रिकेट खेला रह है, ये खबर मिलते ही दाउद इब्राहीम अपने आदमी और Chhota Rajan को वहां भेजता है

ये लोग भी क्रिकेटर के ड्रेस में सादा सादा ड्रेस पहनकर पहुँच जाता है। और अब्दुल कुंजू को देखते ही

उस पर गोलियां चलनी शुरू हो जाती है और अब्दुल कुंजू मारा जाता है। और इस तरह करीब 5 साल के बाद अपने बॉस बड़े राजन का बदला छोटा राजन ले लेता है। और इससे दोनों और करीब आ जाते हैं और धीरे धीरे दाउद इब्राहीम सारा काम छोटा राजन को देने लगता है, और कुछ समय बाद उसका राईट हैण्ड बन जाता है।

दाउद इब्राहीम अपना ब्रांच दुबई में क्यों शिफ्ट करता है? और कैसे छोटा राजन को अपना राईट हैण्ड बनाता है?

छोटा राजन का शादी होता है तो दाउद इब्राहीम उसकी शादी में

जब छोटा राजन का शादी होता है तो दाउद इब्राहीम उसकी शादी में भी जाता है और उसकी बीबी को

अपनी बहन तक बनाता है। और इसी बीच पठान brother’s दाउद इब्राहीम के भाई का मर्डर करवा देता है

और अरुण गब्ली के परिवार के सदस्य का भी मर्डर होता है, जिसमे छोटा राजन और दाउद इब्राहीम का भी

नाम आता है, और उसके बाद इन सब गैंगो के बीच गैंगवार मुंबई के सड़को पर अब आम सी हो जाती है। और पुलिस भी इस गैंगवार से परेशान होकर पुलिस एनकाउंटर करना शुरू कर देती है, आपसी गैंगवार और इधर पुलिस का एनकाउंटर ये सब से बचने और अपने काम को अच्छे ढंग से करने के लिए दाउद इब्राहीम दुबई पहुँच जाता है। और वहीं अपना ब्रांच खोलकर पुरे मुम्बई पर अपने लोगो के जरिये हुक्म चलाता है, जिनमे से एक छोटा राजन भी था जो मुंबई में ही था। और दाउद इब्राहीम के लिए ही काम कर रहा था, और सन् 1987 में छोटा राजन को भी दुबई बुला लेता है। और अब दुबई से ही सारा काम होता है। जब Chhota Rajan दुबई पहुँचता है तो दाउद के पास पहले से एक खास आदमी था जो दाउद इब्राहीम का राईट हैण्ड था।

दाउद इब्राहीम अपना ब्रांच दुबई में क्यों शिफ्ट करता है? और कैसे छोटा राजन को अपना राईट हैण्ड बनाता है?

जिसका नाम छोटा शकील था, जब छोटा राजन दुबई पहुँचता है तो दाउद इब्राहीम धीरे धीरे सारा काम

छोटा राजन से करवाने लगता है। छोटा शकील का सारा काम छिनने लगता है, जिससे छोटा शकील

कुछ ज्यादा ही उससे जलने लगता है, दुबई में छोटा राजन से पहले दाउद इब्राहीम का सारा कम छोटा शकील ही देख रेख कर रहा था। अब इसके बाद से छोटा शकील छोटा राजन को दाउद इब्राहीम से अलग करने की साजिश करने लगता है।

Chhota Rajan के खिलाफ साजिश?

जब भी छोटा शकील को मौका मिलता Chhota Rajan के बारे में कान भरना शुरू कर देते थे।

और कहते थे की भाई आप जिस तरह छोटा राजन को सारा काम दे रहे अगर ये गैंग से कभी

अलग हो गया तो इससे हमारा नुकसान होगा लेकिन दाउद इब्राहीम कहता की ये सिर्फ एक मेनेजर है तुम लोग बेवजह परेशान हो। दाउद इब्राहीम छोटा राजन के काम से बहुत खुश रहते था, और छोटा राजन को बीच बीच में दाउद इनाम भी दिया करता था। और करीब 1990 से 92 तक छोटा राजन के नाम सिर्फ मुंबई में 100 से ज्यादा पब डान्स बार होटल हो चुके थे, और दूसरी तरफ दाउद इब्राहीम की D कंपनी गैंग में साजिश भी चल रही थी। D कंपनी के कुछ और मेम्बर शरद सेट्टी, सुनील रावत जो छोटा शकील के साजिश में मिल जाते हैं, अंदर ही अंदर छोटा राजन को हटाने के लिए, यहाँ से दाउद इब्राहीम का कान भरना और तेज हो जाती है। और बार और छोटा शकील दाउद इब्राहीम से कहता है की भाई आप एक बार और देख लो कहीं

छोटा राजन हमारी गैंग का तख्तापलट न कर दे वो कुछ भी कर सकता है। तुमलोग फिर बेवजह

शक कर रहे हो वो सिर्फ एक मेनेजर है लेकिन बाकि लोग इसे स्वीकार नहीं करते।

और साजिश ऐसे ही आगे भी चलती रहती है, इसी दौरान पठान brother’s ने दाउद इब्राहीम के भाई इब्राहीम काश्कर

की हत्या कर दी गई। और उस क़त्ल का बदला लेने के लिए दाउद इब्राहीम छोटा राजन को चुनता है, छोटा राजन के लड़के मुंबई में थे। अमीरजादा और करीमलाला इन दोनों को मारने का काम छोटा राजन को मिला। दाउद की एक बार मीटिंग चल रही थी जिसमे छोटा राजन नहीं था उस समय छोटा शकील दाउद का कान भरना शुरू कर दिया।

छोटा राजन और दाउद इब्राहीम के बीच दूरियां कब शुरू होती है?

छोटा राजन और दाउद इब्राहीम के बीच दूरियां कब शुरू होती है?

जब एक दिन मीटिंग के दौरान छोटा शकील दाउद के कान भरते हुए कहता है भाई आपने जो इब्राहीम काश्कर

का बदला लेने के लिए छोटा राजन को दिया है उसे अभी तक नहीं किया बहुत वक्त गुजर गया है

अभी तक उसने वो काम नहीं किया और आप कहते है की वो ठीक है। इसकी बातो को सुनकर तुरंत

दाउद भाई छोटा राजन को फोन लगाता है, और पूछता है कि भाई का बदला लेने के लिए जो

काम दिया वो काम कहाँ तक पहुंचा क्या हुआ उसके हत्यारों का, तो छोटा राजन कहता है की भाई हमारे लड़के लगे हुए है उसको मारने के लिए और बहुत जल्द हो जायेगा। जिसको मारना था वो जे जे हॉस्पिटल में भर्ती था, छोटा शकील और सौत्या ये भी उसके गैंग का गंगस्टर ही था और जैसे ही फोन भाई रखता है वैसे ही छोटा शकील कहता है की भाई मुझे एक बार मौका दो मैं ये काम करके दिखाता हूँ। और फिर दाउद इब्राहीम ने उसे कहा ठीक है जाओ करो, और ठीक कुछ घंटो के बाद planning होती है। और जे जे हॉस्पिटल में घुसकर 1992 में  AK-47 से भून देता है और उसे मार करके वहां से बड़े आसनी से निकल जाता है। और इस घटना से दाउद इब्राहीम का मन में थोड़ा बदलाव आता है, छोटा राजन को लेकर।

क्योंकि छोटा राजन उतना दिन से जो काम नहीं कर पा रहा था और इसने तुरंत बोला और कर दिया।

और तब से Chhota Rajan दाउद इब्राहीम के नजर से उतरता गया। उसे अब ज्यादा काम नहीं दिया जा रहा था, और, अब छोटा शकील की टीम को अहमियत देने शुरू किया और ये चीज छोटा राजन को समझ आने लगी थी की उसके पीछे छोटा शकील और उसके आदमी का हाथ है

लेकिन बावजूद इसके भी दाउद को अब भी उस पर भरोषा था और उसकी तारीफ अब भी किया करते थे।

लेकिन फिर भी छोटा शकील और और उसके आदमी उसके खिलाफ हमेशा मौका की तलाश में रहता था।

दाउद इब्राहीम का कान भरने के लिए और भरता भी था, और इस तरह साल गुजरने के बाद साल

1993 आता है। और एक सबसे बड़ा ट्विस्ट आता मार्च 1993 में जब मुंबई में सीरियल ब्लास्ट होता है, इसमें करीब 12 से 14 एक एक करके अलग अलग जगहों पर ब्लास्ट होते हैं। सैकड़ो लोग मारे जाते हैं और हजारो लोग घायल होते हैं और इसके पीछे टाइगर मेमन का साजिश बताता है। और दाउद इब्राहीम का हाथ, ब्लास्ट के बाद दाउद इब्राहीम और छोटे राजन के बीच दूरियां और बढ़ जाती है। और फिर यहाँ से हिन्दू और मुस्लिम, राष्ट्रहित और देश विरोधी जैसे हालात शुरू होते हैं, ब्लाष्ट के बाद छोटा राजन का नाम दाउद इब्राहीम के साथ जोड़ा जाता है। और लगातार छोटा राजन उस वक्त दुबई से मीडिया को फैक्स कर बताता है कि ब्लास्ट में उसका कोई हाथ नहीं है और न ही दाउद भाई का। कुछ समय पश्चात् दुबई में दाउद इब्राहीम एक पार्टी रखती है।

जिसमे छोटा राजन को भी न्योता मिला था और वो जाने के लिए तैयार ही हो रहा था की

एक फोन आता उससे कहता है की भाई तुम पार्टी में एकदम मत जाना आपको टपकाने का फुल

प्लान बनाया गया है। ये सिर्फ एक फोन आया था रियलिटी में क्या था वो उसे अच्छे से पता नहीं।

इसके बाद छोटा राजन दुबई के इंडियन एंबैसी के एक रॉ ऑफिसर को फोन लगाया और उसको सार्कुरी चीजे बता दी, चूँकि 1993 का ब्लास्ट के बाद रॉ की टीम D कंपनी के पीछे लगी थी पकड़ने के लिए।

1993 के ब्लास्ट के कुछ 2 – 3 महीने बाद Chhota Rajan दुबई से निकलना चाहता था, लेकिन छोटा राजन का

पासपोर्ट किसी शेख के पास रखा था। जिस वजह से वो दुबई छोड़कर नहीं जा सकता था, उसके बाद

रॉ के एजेंट को फोन करता है और फिर वही रॉ के ऑफिसर उसका जुगाड़ करता है। और उसी वक्त

छोटा राजन चुप चाप दुबई से काठमांडू चला जाता है। उसके बाद वहां से वो मलेशिया निकल जाता है क्योंकि दाउद इब्राहीम  का वहां पर भी अच्छा खासा नेटवर्क था, और कुछ वक्त बाद दाउद इब्राहीम को पता चल जाती है की छोटा राजन गायब हो चुका है। और अब छोटा शकील को अब पूरा मौका मिल जाता है उसके खिलाफ बोलने का और उसके बाद दाउद इब्राहीम को सारी चीजे बताई जाती है। अब दाउद इब्राहीम और छोटा राजन एकदम अलग हो चुके थे और छोटा राजन छुपा रहता है की कहीं दाउद इब्राहीम के आदमी उसे मार न दे। और इधर दाउद इब्राहीम इसको ढूँढ रही थी क्योंकि छोटा राजन को दाउद इब्राहीम के D कंपनी के बारे में सब राज पता था। इस ग़लतफ़हमी की वजह से दोनों के बीच दुश्मनी पैदा हो जाती है, छोटा राजन अब अपना अलग गैंग बना लेता है।

छोटा राजन छुपता फिरता रहता है कभी ये देश कभी वो देश छोटा राजन और D कंपनी के बीच

कई बार लड़ाई होती हैं और दोनों गैंगो के लोग मारे जाते है और साल 2000 में छोटा शकील को

पता चलता है की छोटा राजन बैंकोक में है तो उसे मारने के लिए बैंकोक शूटर भेजता है।

छोटा राजन को गोली लगने के बाद भी बच जाता है और उसके बाद छोटा राजन हॉस्पिटल जाता है। और हॉस्पिटल में भी उसे मारने की साजिश होती है लेकिन अचानक वो हॉस्पिटल से भाग जाता है।

छोटा राजन को मुंबई पुलिस और CBI कैसे पकड़ती है?

छोटा राजन को मुंबई पुलिस और CBI कैसे पकड़ती है?

और उसके बाद छोटा राजन का ठिकाना किसी को पता नहीं चल पाता है, 2001 के बाद Chhota Rajan

पलट के बदला लेता है दाउद इब्राहीम के लोग से और ये लड़ाई का सिलसिला चलती रहती है।

और छोटा राजन देश बदलता रहता है, इस बीच मीडिया से संपर्क करता है और मीडिया से दाउद इब्राहीम के

खिलाफ सब खुलकर बताना शुरू कर देता है। छोटा राजन ने रॉ को दाउद इब्राहीम के ठिकाने और अड्डे के बारे में बताया। ये दुश्मनी  बड़ा रूप ले चुकी थी और उधर छोटा शकील तलाश करता रहा और एक लास्ट जानकारी आती है 2015 को कि छोटा राजन ऑस्ट्रेलिया में हैं। और उसको मारने के लिए दाउद इब्राहीम शूटर भेजते हैं लेकिन छोटा राजन को इसकी खबर मिल जाती है। और वो वहां से भी वो भाग जाता है और इसके बाद वो पहुँच जाता है इंडोनेशिया के बाली में, अक्टूबर 2015 में जब ऑस्ट्रेलिया से छोटा राजन निकला तो भारत ने Interpol को छोटा राजन के बारे में सारी जानकारी पहले से ही दे रखी थी। उसकी गिरफ़्तारी के लिए और जब वो ऑस्ट्रेलिया से निकला और जब इंडोनेशिया पहुंचा तो ऑस्ट्रलिया के एजेंसी इंडोनेशिया अथॉरिटी को इन्फॉर्म कर देती है।

छोटा राजन को मुंबई पुलिस और CBI कैसे पकड़ती है?

जैसे है छोटा राजन इंडोनेशिया के बाली में लैंड करता है तो इंडोनेशिया अथॉरिटी ऑस्ट्रेलिया के सूचना के आधार पर

उसे रोक लेती है, और उससे पूछताछ करने लगती है और इसका पासपोर्ट मोहन कुमार के नाम से था।

लेकिन जो जानकारी Interpol को दी गई थी वो छोटा राजन और राजेंद्र सदाशिव निखलजे नाम से दी गई थी। कई घंटो के पूछ ताछ पर भी वो अपने आप को मोहन कुमार बताता है, और किसी तरह हमारे एंबैसी के द्वारा सीबीआई को खबर दी जाती है। उसके बाद सीबीआई की एक टीम इंडोनेशिया रवाना होती है, कन्फर्म करने के लिए।

छोटा राजन को कहाँ रखा गया है?

CBI के पास छोटा राजन के फिंगर प्रिंट थी, जिससे छोटा राजन के फिंगर प्रिंट से मैच कराई जाती है।

सीबीआई के पास करीब 15 फिंगर प्रिंट थी, जिसमे से करीब 11 के आपपास फिंगर प्रिंट मैच कर जाती है।

इसके आलावा सीबीआई के पास और भी सबूत थी जिससे साबित हो गया कि ये मोहन कुमार नहीं

डॉन छोटा राजन ही है। उसके बाद इंडोनेशिया अथॉरिटी इसको भारत के सीबीआई के हवाले कर देती है, अक्टूबर 2015 में इसे सीबीआई दिल्ली ले के पहुँचती है। और एअरपोर्ट से बड़ी चालाकी से सभी से छुपा कर मीडिया वालो को धोखा देकर सीधा सीबीआई हेड क्वार्टर ले के जाती है और वहां उससे पूछताछ की जाती है। उसके बाद उसे तिहाड़ जेल भेज दिया जाता है, ड्रग्स, हथियार वसूली, तस्करी ,मर्डर जैसे करीब 70 मामले दर्ज है, और ये अधिकतर मामले मुंबई के थाने में दर्ज है। कुछ सूत्रों के हवाले से खबर ये थी कीछोटा राजन को मुंबई में जान को खतरा था। तो छोटा राजन को दिल्ली के तिहाड़ जेल में रखा जाता है क्योंकि वो ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। इसे कभी मीडिया के बीच आने दिया, इनके ऊपर बहुत सारे मुक़दमे है जिसके फैसले आने अभी बाकि है।

छोटा राजन का जो परिवार है वो मुंबई में ही है पत्नी और तीन बेटियां।

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Anshuman Choudhary

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