Apj Abdul Kalam जी का संघर्षपूर्ण जीवन, शिक्षा, History, किताबें, Full name

Apj Abdul Kalam जी का जीवन परिचय

Apj Abdul Kalam जी का जीवन परिचय  हिंदी में

आज मैं आपको महापुरुष Apj Abdul Kalam जी के बारे में बताऊंगा जिसने लालटेन के नीचे पढ़कर अपने आप को इस काबिल बनाया की लोग आज भी इसकी तारीफे करते थकते नहीं है। ये वैसे इन्सान थे जिसके एक कान में भगवत गीता के श्लोक गूंजते थे तो दुसरे कान में Charles Robert Darwin के सिध्दांत। नाव पर तीर्थयात्रियो को रामेश्वरम के मंदिर ले जाया करते थे और जब तीर्थयात्री मंदिर का चक्कर लगाते थे तो उतनी देर में कलाम जी Physics के सिध्दांत पढ़ा करते थे। अपना खर्चा निकालने के लिए 8 साल की उम्र में अख़बार बेचना शुरू कियें, क्योंकि अख़बार बेचने के साथ साथ कलाम जी पूरे रास्ते अख़बार भी पढ़ लेगा ये सोचकर अख़बार बेचते और पूरा रस्ता पुरे अख़बार को पढ़ लेते थे। इनका परिवार बहुत बड़ा था Abdul Kalam जी कुल 10 भाई बहन थे, आर्थिक स्थिति कुछ ठीक नहीं थी।

अपने गाँव से कई किलोमीटर दूर सुबह 4 बजे मैथ का ट्यूशन पढने किसी भी मौसम में पहुँच जाते थे।

कलाम जी को स्कूल में एक मास्टर जी थपड़ मारके पीछे की बेंच पे बिठा देते हैं। तो आइये

जानते हैं कि किस तरह Apj Abdul Kalam जी संघर्ष कर इतने ऊपर तक खुद को पहुंचाते हैं। DRDO के

डायरेक्टर से लेकर भारत के राष्ट्रपति बनने तक का सफ़र अब्दुल कलाम जी के लिए इतना आसान नहीं था।

Apj Abdul Kalam जी का जन्म व परिवार, घर (Birth & Family)

Apj Abdul Kalam जी का जन्म व परिवार (Birth & Family)
अब्दुल कलाम जी मां के बगल में बैठे हुए
Apj Abdul Kalam Birthday/ जन्मदिन 15 अक्टूबर सन् 1931
अब्दुल कलाम जी का जन्मस्थान गाँव धनुषकोडी, रामेश्वरम (तमिलनाडु)
अब्दुल कलाम जी का निधन27 जुलाई  साल 2015
Apj Abdul Kalam जी का जन्म व परिवार (Birth & Family) अब्दुल कलाम जी पुराना घर
पुराना घर
Apj Abdul Kalam full name और उसका मतलब
अब्दुल इनके दादा जी के पिताजी (Great Grandfather) का नाम था
पाकिर इनके दादा (Grandfather) जी का नाम था
जैनुलअब्दीन (Jainulabdeen) इनके पिताजी (Father) का नाम था
अब्दुल कलाम इनका खुद का नाम है

इनका जन्म एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ। उस वक्त कलाम जी की घर वालो की आर्थिक स्थिति बहुत ही ख़राब थी। कलाम जी 10 भाई बहन थे 5 भाई और 5 बहनें थी, पेशे से इनके पिताजी जैनुलअब्दीन एक नाविक थे। और सारे परिवार एक साथ ही रहते थे कोई अलग नहीं रहते थे। इनके पिता जी ज्यादा पढ़े लिखे न होने की वजह से परिवार का खर्चा उठाना मुश्किल होता था। इनके परिवार वाले शुरू से बहुत तकलीफे उठाई है, इनके पिताजी मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे। इनके पिताजी पढ़े लिखे तो नहीं थे, लेकिन अपने बच्चे को संस्कार जरुर दिए जो जीवन में होना बेहद जरुरी होता है। और संस्कार इनके जीवन में बहुत काम आये और एक दिन इन्हें बुलन्दी की ऊँचाइयों पर ले गया।

अब्दुल कलाम जी का प्रारंभिक शिक्षा (Education)

अब्दुल कलाम जी की पुरानी तस्वीर old picture

अब्दुल कलाम जी का शिक्षा दीक्षा बहुत मुश्किलों से हुआ था, लेकिन इनकी मेहनत देखकर इनके माता पिताजी ने बहुत साथ दिया आर्थिक स्थिति ख़राब होने के बावजूद भी, हर कदम पर इनके परिवार वालो ने भी मदद की। इनकी बचपन की शिक्षा एक गाँव की एक प्राथमिक विधालय से हुई, इनकी secondary school की पढाई Schwartz Ramnathpuram Higher Secondary School ( Singarathoppu Chalai Bazar Ramnathpuram Tamilnadu 623501) से होती है।

Abdul kalam ji school Schwartz Ramnathpuram Higher Secondary School
Secondary Education Schwartz Ramnathpuram Higher Secondary School (Singarathoppu Chalai Bazar Ramnathpuram Tamilnadu 623501)
Aeronautical engineering
(Graduation)
MIT – Madras Institute of Technology Anna University Tamil Nadu – (MIT Rd, Radha Nagar, Chromepet, Chennai, Tamil Nadu 600044)

Kalam जी जब Engineering University Madras Institute of Technology में पहुंचे?

अब्दुल कलाम जी ने तो बहुत पहले ही आसमान में उड़ने का सपना देख चुके थे, तो अब्दुल कलाम जी मद्रास (चेन्नई) के सबसे बड़े Engineering University Highest College और पुरे देश के सबसे अच्छे कॉलेजों में से एक MITMadras Institute of Technology University में Aeronautical engineering में एडमिशन लेते हैं। एक प्रोजेक्ट बनाने के दौरान कलाम जी कुछ पैसे अपनी बहन से लेते हैं उनकी बहन अपना जेवर गहना गिरवी रख के 1000 रूपये अपने भाई अब्दुल कलाम जी को देते हैं। प्रोजेक्ट में इन्हें एक विमान का डिज़ाइन बनाने के लिए मिला था, तो इसने डिज़ाइन बनाया और टीचर को दिखाया लेकिन टीचर को डिज़ाइन पसंद नहीं आया। और टीचर कहते हैं कि गर तुमने एक अच्छा डिज़ाइन नहीं बनाया तो तुमसे Scholarship छीन जाएगी।

Abdul kalam Engineering University MIT  - Madras Institute of Technology University

इनका दिमाग चकरा गया, बहन ने गहने गिरवी रख के मुझे पैसे दिए थे अगर ये Scholarship छीन गया तो सब मेहनत बेकार हो जाएगी। और इन्होंने टीचर से कहा कि 1 महीना का टाइम दीजिये बढ़िया मैं डिज़ाइन बना के दिखाऊंगा। लेकिन टीचर नहीं माने और कहा की तुम्हारे पास सिर्फ 3 दिन का वक्त है, और उसके बाद तो और घबरा गए, इसके बाद से इसने न तो 3 दिन अच्छा से खाना खाएं और न ही 3 दिन अच्छे से सो पाए। दिनरात लगातार इन्होंने उस प्रोजेक्ट पर काम किया पूरा जी जान लगा दिया, और एक अच्छा डिज़ाइन बनाया और जब प्रोफेसर ने ये डिज़ाइन देखा तो हैरान रह गए और कहा बहुद खूब बढ़िया डिज़ाइन बनाये हो।

Madras Institute of Technology University से Aeronautical engineering की डिग्री लेने के बाद जॉब के लिए अप्लाई करते हैं।

अब्दुल कलाम जी जब जॉब के लिए अप्लाई करते हैं?

जब अब्दुल कलाम जी जॉब के लिए अप्लाई करते हैं, तो इनके पास Interview की दो विकल्प सामने आते हैं।

एक Ministry of Defense से और दूसरी Air Force Dehradun से इनको कहाँ जाना था, तो स्वाभाविक है Air Force में, Defense जो कि दिल्ली में था। और Air Force जो कि देहरादून में था, जब इन्हें वापसी में दिल्ली आना था तो जब ये देहरादून गए । वहां 25 लोग आये थे Interview के लिए, सिट सिर्फ 25 थी जिसमे सिर्फ 8 ही खाली थे लेकिन इनकी रैंक कितनी आई 9 वीं 1 नंबर से पीछे रह गए। और जब देहरादून से निकले उसके बाद अब्दुल कलाम जी ऋषिकेश में उतर जाते हैं वहां इनको स्वामी शिवानन्द जी से मिलना था जो बहुत ही जाने मने स्वामी हैं। वहां जाकर इन्होंने अपनी तकलीफें बताई तो उसने इनको गीता पढने के लिए दिया और स्वामी ने कहा की गर ख्वाइशे आपकी दिल से निकलती है, और उसमे शिध्द्त हो तो तुमने जो सोचा है वो जरुर होगा, तुम विश्वाश रखो।

अब्दुल कलाम जी ऋषिकेश के स्वामी शिवानन्द जी से मिला

और जब अब्दुल कलाम जी लौटकर दिल्ली आयें अब उसके पास सिर्फ Ministry of Defense DRDO की नौकरी बची थी। किनको पता था की यहीं से इनका सपना साकार होनेवाला था और भारत देश को मिसाइल और परमाणु शक्ति (Nuclear Power) मिलने वाला था। और यहाँ आने के बाद इनका चयन हो जाता है और डॉ. विक्रम सारा भाई के टीम में आ जाते हैं, अब्दुल कलाम जी उस वक्त बहुत तेज थे।

अब्दुल कलाम जी और विक्रम सारा भाई की टीम

जब अब्दुल कलाम जी DRDO ज्वाइन किया?

DRDO ज्वाइन करने के कुछ दिन बाद1963 में इनको सारा विक्रम भाई की टीम से सेलेक्ट किया गया,

जब अब्दुल कलाम जी DRDO ज्वाइन किया? ISRO पुराना फोटो Old picture of ISRO

नासा ट्रेनिंग के लिए। और 6 महीने के लिए Apj Abdul Kalam जी को ट्रेनिंग के लिए अमेरिका नासा भेज दिया गया। NASA के बारे में तो सबको पता होगा ही दुनिया का सबसे बड़ा अंतरिक्ष रिसर्च सेंटर है, NASA ने देखा की अब्दुल कलाम जी तो बहुत तेज हैं। तो NASA वालो ने इन्हें ऑफर दिया कि तुम यहीं रह जाओ तुम्हे हम अमेरिकन सिटीजन देते है। सैलरी तुम्हे भारत से 5 गुना ज्यादा देंगे यहीं शादी कर लो और रह जाओ। कुछ समय के लिए इनके मन ये विचार आया की यहीं रह जाऊं चुनाव करना कठिन था इनके लिए। लेकिन इन्होंने इंकार कर दिया और सोचा देश सेवा की इस अवसर को हम गंवाना नहीं चाहते हैं और ट्रेनिंग ले के अपने देश लौट गए। और इसके बाद इन्होंने भारत आकर ISRO (इसरो) ज्वाइन कर लिया उस वक्त इनका ऑफिस तक नहीं था।

ISRO के वैज्ञानिक साइकिल से रॉकेट को ले जाते हुए

जिस स्थिति में उस समय इन्होंने ISRO ज्वाइन किया था इनके पास ऑफिस जैसा कुछ भी नहीं था।

एक चर्च को इनलोगो को ऑफिस बनाना पड़ा और समुन्द्र किनारे इन लोगो ने अपना रॉकेट लांच पेड बनाया।

गौसला में इनकी लेबोरटरी बनाई गई एक घर को वर्कशॉप बनाया, तैयार किये गए रोकेट को उस वक्त लाने और

लांच पेड तक ले जाने तक के लिए साधन नहीं थे। तो इन लोगो ने साइकिल और बैलगाड़ी पर रॉकेट

के अलग अलग पार्ट को ले जाकर समुन्द्र के किनारे लांच पेड तक ले गए। आपने बहुत सी ऐसी तस्वीरे

देखीं ही होंगी जिसमे कुछ लोग रॉकेट के पुर्जे को साइकिल और बैलगाड़ी पर ले जा रहे हैं दरअसल ये वही समय था जब अब्दुल कलाम जी ISRO में काम रहे थे।

जब अब्दुल कलाम जी DRDO ज्वाइन किया? क ISRO साइकिल से रॉकेट ले जाते हुए
जब अब्दुल कलाम जी DRDO ज्वाइन किया?

पहला sounding रॉकेट कब लांच किया? और जब अब्दुल कलाम जी को ISRO Director पद मिला ?

ISRO ज्वाइन करने के कुछ साल बाद अब्दुल कलाम जी ने 1963 में पहला sounding रॉकेट लांच करता है।

इनकी सगाई फिक्स हो गई थी, लेकिन काम में कलाम जी इतना मशगुल रहते थे की अपने ही सगाई में

(Ring ceremony ) में जाना भूल गए और लोग वहां इन्तेजार करते रह गए। और वहां अब्दुल कलाम जी रॉकेट

बनाने में व्यस्त थे और उस समय इनकी उम्र 32 साल थी। जब इनको 1969 में इसरो के डायरेक्टर के पद मिला तो इसने सोचा SLV-3 (Satellite launch vehicle) satellite लांच करने का vehicle होता है यानि कि रॉकेट को जिसपर रखकर लांच किया जाता है। उस समय ये सब चीजो पर सरकार ज्यादा ध्यान नहो देती थी इसका अलग से कोई बजट नहीं होता था। तो इन्होंने SLV-3 (Satellite launch vehicle) और PSLV दोनों प्रोजेक्ट को एक साथ करने का निर्णय किया, दोनों प्रोजेक्ट में एक ही लागत आनेवाला था। कलाम जी दोनों प्रोजेक्ट को एक साथ करके 80 फिसद तक पैसा बचाने का दिमाग लगाता है यानि जिस प्रोजेक्ट में 2 रुपये खर्च आनेवाली थी, वहां अब्दुल कलाम जी उस प्रोजेक्ट को 1 रुपये 20 पैसे में ही कर देते, और 80 पैसा बच भी जायेगा।

और दोनों प्रोजेक्ट भी पूरा हो जायेगा। और जब इसके लिए सरकार से फण्ड माँगा तो इंदिरा गाँधी जी ने

कहा फण्ड नहीं है, और और बाद में थोड़ा सा फण्ड इनको देते हैं। और थोड़े से फण्ड मिलने के बाद उसी में अपना जी जान लगा दिया, 16 से 18 घंटे रोज काम करते थे। 1969 से लेकर 1989 तक जी जान से मेहनत किये और सिर्फ दो बार ही छुट्टी लिए एक बार पिताजी के निधन पर और एक बार माता जी के निधन पर उसके बाद किसी भी तरह का जीवन में छुट्टी नहीं लिया।

जब अब्दुल कलाम जी DRDO ज्वाइन किया?

जब 1979 में SLV-3 असफल/Failed हो गया?

10 साल के परिश्रम के बावजूद 1979 में SLV-3 (Satellite launch vehicle) असफल हो गया।

जब ये फेल हुआ तो बहुत घबरा गए, पूरा देश इनको देख रहे थे। कलाम जी के जो प्रोफ़ेसर थे

और प्रोजेक्ट के Chairman सतीश धवन इन्होंने कलाम जी को बुलाया और कहा चलो बाहर मीडिया इन्तेजार कर रही है।

उनसे बात करना है, लेकिन Apj Abdul Kalam जी घबराया हुआ था वो मीडिया को क्या जवाब देगा इतना बड़ा जो नुकसान हुआ है। मीडिया वाले तो मुझे ही जिम्मेवार ठहराएँगे वहीं प्रोफ़ेसर चेयरमैन सतीश धवन ने माइक लेकर कहा पहली बार किया है असफल हुआ है। एक साल के अंदर यही टीम दोबारा इसी SLV-3 (Satellite launch vehicle) को सफल लांच करके दिखायेगी। ये सारा इल्जाम प्रोफ़ेसर सतीश धवन जी अपने ऊपर ले लेते हैं, ये देखकर A. P. J. Abdul Kalam हैरान हो जाते हैं। उसके बाद एक साल इनकी टीम जी जान से मेहनत करती है, और साल 1980 में SLV-3 को सफल करके दिखाते भी हैं। तो इस बार मीडिया के सामने सतीश धवन जी माइक A. P. J. Abdul Kalam के हाथ में थमा देते हैं, अब तुम सफल हो गए अब तुम जावाब दो।

अब्दुल कलाम जी हैरान हो जाते हैं और इन्होंने यहां से सिखा की कैसे failure होने पर उसने सारा क्रेडिट

अपने ऊपर ले लिए और जब सफल हुआ तो सारा क्रेडिट मुझे दे दिया।

इंदिरा गाँधी जी जब अब्दुल कलाम जी को मिलने के लिए बुलाती?

अब्दुल कलाम जी के काम से इंदिरा गाँधी भी से प्रभावित हुई और दोनों ने बहुत बढ़िया जबरदस्त काम किया,

सतीश धवन से इंदिरा गाँधी जी कहती है कि वो A. P. J. Abdul Kalam से मिलना चाहते हैं। उसके बाद प्रोफ़ेसर सतीश धवन अब्दुल कलाम जी को फोन लगते हैं और कहते हैं की आ जाओ तुम्हे इंदिरा गाँधी जी बुला रही हैं। लेकिन अब्दुल कलाम जी कहते है कि मेरे पास न तो अच्छे कपड़े है और चप्पल भी टूटे हुए हैं। मैं उसी चप्पल में घूम रहा हूँ ऐसी हालात और स्थिति में कैसे उनसे जाकर मिलूं। तो उन्होंने कहा की भाई Abdul Kalam तुम पहले से ही सफलता का सूट पहने हुए हो, ऐसा कहने पर अब्दुल कलाम जी इंदिरा गाँधी जी से मिलने पहुँच जाते हैं। और उसके बाद इंदिरा गाँधी जी कहती है की तुम्हे डिफेंस में और काम करना होगा।

हमारे सभी पड़ोसी देश चाइना पाकिस्तान सभी मिसाइले बना रही है, तुम भी हमारे देश के लिए मिसाइल बनाओ।और उसी समय पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी से अब्दुल कलाम जी की मुलाकात होती है। जब कलाम जी अटल बिहारी वाजपेयी जी से हाथ मिलाने की कोशिश करते हैं तो अटल जी उनसे हाथ नहीं मिलाते है। सीधे वो कलाम जी को गले लगा लेते हैं और इंदिरा गाँधी जी ये सब देख कर मुस्कुराती है। और कहती है, ध्यान रखना अटल जी ये मुस्लमान है अटल जी कहते की ये मुसलमान बाद में है सबसे पहले ये हमारे देश के नागरिक है, और उसके बाद हमारे देश के महान साइंटिस्ट हैं। उनको देखकर Abdul Kalam जी मुस्कुराये अब सफलता मिलनी शुरू हो जाती है।

जब अब्दुल कलाम जी को DRDO का Director बनाया गया?

साल 1981 में अब्दुल कलाम जी को पद्मा भूसन अवार्ड मिलता है, और 1982 में DRDO का Director बनाया गया।

अब्ब्कदुल कलाम जी को जब पद्बमा भूषण मिला, अब्दुल कलाम जी को DRDO का Director बनाया गया?

मन से कलाम जी खुश नहीं थे क्योंकि उधर चाइना, पाकिस्तान मिसाइल बना रहे थे, उन्हें देश की सुरक्षा खतरे में नजर आ रही थी। और कलाम जी महाभारत पढना शुरू किया और वहां से उन्होंने बर्बरीक की कहानी पढ़ी, उनसे वो बहुत inspire हुए । और वहां से इन्होंने दिमाग लगाया की क्यों न ऐसा मिसाइल बनाया जाये की गर कोई दुश्मन राईट भागे तो मिसाइल भी उधर जाये अगर दुश्मन left भागे तो मिसाइल भी left की तरफ जाये। ऐसी गाइडेड मिसाइल कैसे बनाया जाये, कलाम जी वहां से Integrated Guided Missile मोडल तैयार करते हैं और उसके बाद कलाम जी एक के बाद एक मिसाइल बना कर तैयार कर देते हैं। 1985 में त्रिशूल नाम की मिसाइल लांच की, फिर 1988 में पृथ्वी लांच की, फिर 1989 से अग्नि मिसाइल पर काम कर रहा था।

आकाश कर दिया नाग कर दिया लेकिन अग्नि में बार बार Failed हो जा रहा था। ये अग्नि मिसाइल बहुत

important प्रोजेक्ट था और 1989 खत्म होने से पहले इन्होंने इसे भी सफल बनाया। अग्नि मिसाइल बना लेने के बाद

भारत 1989 में पुरे देश में छटा (6th) देश बन चुका था, जिसके पास इतना शक्तिशाली मिसाइल थी।

वो Abdul Kalam जी हैं, जिन्होंने भारत को Nuclear Power ले क्षेत्र में 6th पोजीशन पर लाकर खड़ा किया।

2017 में अब्दुल कलाम जी के दिमाग से ही 104 satellite एक साथ भारत ने एक रॉकेट से लांच की, दुनिया में सबसे सस्ता ये अब्दुल कलाम जी की ही देन थी। वहीं 1979 में कोई देश भारत की मदद नहीं कर रही थी लेकिन आज वही देश कह रही है की मेरा भी satellite लांच कर दो अपने रॉकेट के साथ।

US. नीदरलैंड, इजराइल, कजाखस्तान, स्विट्ज़रलैंड इसको मिला के भारत ने 104 satellite भेजी थी,

ये Apj Abdul Kalam जी की ही देन है।

भारत ने किस तरह ऑपरेशन शक्ति के नाम से परमाणु परिक्षण किया?

जब 1993 में PSLV सफल हुई तो उस समय दुनिया भर में परमाणु शक्ति (Nuclear Power) पर बात हो रही थी।

हर देश दूसरे देश पर Satellite के जरिये नजर रख रही थी कोई देश परमाणु शक्ति का परिक्षण

तो नहीं कर रहा है। तो यहाँ अब्दुल कलाम जी दिमाग लगते हैं, किसी को पता न चले तो इन्होंने साइंटिस्ट को ही आर्मी के ड्रेस पहना दी। सिर्फ satellite को उलझाने के लिए ताकि satellite से जब कोई देश देखे तो उसे लगे कि ये सिर्फ आर्मी है। और ऐसे ही धोखा देखर अपना काम कर रहे थे, काम होने के बाद जमीन को साफ कर देते थे। जिससे की कोई देश satellite से देख न पाए की वहां क्या हुआ था, 1992 से 1997 तक भारत ने खूब मेहनत की। और तो और अगल बगल के गाँव वालो को भी पता चलने नहीं दिया की यहाँ क्या हुआ। और साल 1998 में भारत ने ऑपरेशन शक्ति के नाम से परमाणु परिक्षण (Nuclear Power) कर दिया। आज उन्ही के प्रयसो से भारत परमाणु समृद्ध देश बन पाया है उस वक्त सिर्फ 5 देश थे जिसके पास Nuclear Power थी।

USA, फ़्रांस, United Kingdom, China, और Russia भारत को किसी से दिक्कत नहीं थी सिर्फ चाइना से थी क्योंकि चाइना

चुपचाप पाकिस्तान को भी परमाणु शक्ति दे रहा था। और 1997 में अब्दुल कलाम जी को भारत रत्न अवार्ड से

सम्मानित किया जाता है। करीब 41 साल तक अब्दुल कलाम जी ने भारत की सेवा की और 1999 आते आते

कलाम जी रिटायर्ड हो जाते हैं और उधर अटल बिहारी वाजपेयी जी अपना मंत्रिमंडल बना रहे थे।

Apj Abdul Kalam जी राष्ट्रपति शपथ ग्रहण में किनको बुलाते हैं?

अटल जी अपना मंत्रिमंडल बनाने के दौरान अटल जी अब्दुल कलाम जी को फोन लगाते हैं, और कहते हैं कि हम अपना मंत्रिमंडल बना रहे हैं, आपको मिनोस्ट्री देना चाहते हैं। आ जाओ आप क्यों की उन्हें पता था की वो अच्छा काम करेंगे, अब्दुल कलाम जी ने एक दिन का वक्त लिया। और एक दिन के बाद Apj Abdul Kalam जी मना कर दते हैं, वो कुछ और चाहते थे। और मिलकर जाकर बताते हैं कि मुझे एक नई पीढ़ी तैयर करनी है, जो भारत को को विश्व गुरु बना सके और ऐसी पीढ़ी बनाने के लिए मैं कालेजो में पढ़ाना चाहता हूँ। अपनी टीचिंग प्रोफेशन के लिए अब्दुल कलाम जी Annamalai University south तमिलनाडु चले गए। और जब 2002 में राष्ट्रपति बनने का समय आता है तो उसमे बहुत से लोगो का नाम आता है उसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी जी अब्दुल कलाम जी को फोन करते है।

बिहारी वाजपेयी जी अब्दुल कलाम जी

अटल जी कहते है की मैं सिर्फ एक Request करना चाहता हूँ अबकी बार मना नही करना अब्दुल कलाम जी,

तो अब्दुल कलाम जी बोलते हैं की ठीक है बताइये। तो अटल जी कहते हैं की मैं आपका नाम देश के राष्ट्रपति बनाने की recommendation में देना चाहते हैं। अब्दुल जी कहते हैं बस 1 घंटे का समय दीजिये और 1 घंटे बाद फोन करते है और कहते है की ठीक है मैं तैयार हूँ। और जब राष्ट्रपति शपथ लेने का वक्त आया तो उनसे पूछा गया कि आप शपथ समारोह में किनको किनको बुलाना चाहते हैं। तो कलाम जी बोलते हैं की उसके सिर्फ दो ही परम मित्र है जो तमिलनाडु में हैं, जब मैं वहां रहा करता था तब उस वक्त एक मोची था जो मेरी फटे जूते को सिलने में बड़ी मदद किया करते थे उन्हें बुला लीजिये।

और एक ढाबे वाला जिसने खाना खिलाया और कभी कभी उसने दो रोटी ज्यादा खिलाई उन दोनों को जरुर बुलाइए।

Apj Abdul Kalam जी सिर्फ राष्ट्रपति भवन सिर्फ दो बैग ले के गए थे और जब रिटायर्ड हुए तब भी वो दो बैग ही ले के लौटे थे। अब्दुल कलाम जी की कुल संपति में कुछ भी नहीं था, बस रामेश्वरम में एक उनके पैतृक घर जो उसके पिताजी ने बनाई थी, 2500 के करीब किताबे थी, और एक वीणा थी जिसे वो बजाया करते थे और बहुत पसंद करते थे, और एक कलाई की घड़ी थी और एक CD प्लेयर थी जिसमे वो कभी कभी भजन सुना करते थे।

अब्दुल कलाम जी का वीणा

एक लैपटॉप थी, 6 कमीजे थी जिसमे से 3 उनकी खुद की थी और 3 DRDO ने दी थी,

4 पैंट थी 2 उनकी खुद की थी 2 DRDO की थी, 3 सूट थे और एक जोड़ी जूता।

लेकिन 40 Doctorates की उपाधि थी, जबकि इन्होंने कभी Doctorates की पढाई कभी नहीं की थी। जिस भी यूनिवर्सिटी में

अब्दुल कलाम जी जाते थे वहां उन्हें Doctorates की उपाधि बड़े सम्मान से दी जाती थी।

Apj Abdul Kalam जी को कौन कौन से अवार्ड्स मिले?

अब्दुल कलाम जी को अब तक दिए गए सभी Awards
पद्मा भूषन
पद्मा विभूषण
भारत रत्ना
वीर संवारकर अवार्ड
रामानुजन अवार्ड
70 साल की उम्र में अब्दुल कलाम जी को Youth Icon award दिया गया
Modi ji aur APJ abdul kalam ji

अब्दुल कलाम जी का व्यवहार दूसरे के प्रति कैसा था?

अब्दुल कलाम जी का व्यवहार दूसरे के प्रति कैसा था?

किसी दूसरे के प्रति अब्दुल कलाम जी के दिल में ऐसा व्यवहार था की शायद ही अब किसी इंसान में देखने को मिलेगी। सब को तो पता ही होगा कि अब्दुल कलाम जी एक मुसलमान थे लेकिन एक नंबर के vegetarian थे, इन्सान से तो प्यार था ही, उतना ही प्यार जानवरों से भी था, अब्दुल कलाम जी पक्षियों को पर्यावरण का सूचक मानते हैं। और गर वो मुसीबत में है तो समझ लो की हमलोग भी मुसीबत में हैं, ऐसी सोच रखने वाले महा पुरुष एक ही बार पैदा लेते हैं। DRDO की ऑफिस की जो दीवारें थी उस पर किसी ने बोला की सुरक्षा के लिए दीवार पर शीशा लगा दे क्या तो कलाम जी माना कर दिया कहा ये पक्षियों के लिए नुकसानदायक हो सकता है, मत लगाओ, और जब प्रेसिडेंट बने थे और जब वो राष्ट्रपति भवन में थे और जब वो मुग़ल गार्डन में

अब्दुल कलाम जी  vegetarian थे

टहल रहे थे तब उसने देखा की एक मोर अपना मुंह न खोल पा रहा और न ही बंद कर पा रहा है, और उसके बाद specially एक डॉक्टर को बुलवा कर उसकी जाँच करवाया तो पता चला की मोर के गले में ट्यूमर है जिसकी वजह से वो अपना मुंह बंद नहीं कर पा रहा है और नहीं ही खोल पा रहा है तो उसने उसका इलाज करवाया ये होती है इंसान की असली महानता, ये उनकी मदद कर रहा है जो उसे उसके बदले कुछ नहीं दे सकती है।

अब्दुल कलाम जी और शाहरुख़ खान साथ में
bihar ke anand kumar sir aur sath men abdul kalam ji
abdul kalam ji बच्चो के साथ

जब अब्दुल कलाम जी को IIT BHU में Invite किया गया तो क्या हुआ?

एक बार अब्दुल कलाम जी को IIT BHU में Invite किया गया था, वहां पर 7 कुर्सियां लगी हुई थी।

और बीच वाली कुर्सी थोड़ी बाकियों कुर्सियों से ऊँची थी क्योंकि वो कुर्सी राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी के लिए

लगाई गई थी। और जब उसने ये देखा और उनसे पूछा कि ये कुर्सी बाकि कुर्सियों से ऊँची क्यों हैं? तो कहा की ये आपके लिए है आप एक राष्ट्रपति इसलिए, तो अब्दुल कलाम जी कहते हैं इसे तुरंत हटाओ बराबर की कुर्सी लगाओ, पर उनलोगों ने कहा नहीं सर ये स्पेशल कुर्सी है चीफ गेस्ट के लिए। अब्दुल कलाम जी कहते हैं न न इसे हटाओ, बहुत कहने पर उस कुर्सी को उठाया जाता है। और बराबर की कुर्सियां लगाईं जाती है, कभी भी खुद को दुसरो के सामने ऊँचा दिखाने की कोशिश नहीं करते थे।

अब्दुल कलाम जी हमेशा अपने पास कुरान और भगवत गीता रखते थे।

राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी जब अपने सपरिवार को राष्ट्रपति भवन बुलाते हैं?

अब्दुल कलाम जी अपने परिवार से बहुत प्यार करते थे, 2006 में जब Apj Abdul Kalam जी अपने सपरिवार को राष्ट्रपति भवन बुलाते हैं। तो उनके परिवार राष्ट्रपति भवन में 8 दिन रहते हैं, वो लोग 10 भाई बहन थे और उन सब के बच्चो को मिलाकर कुल 52 लोग आये थे। और देखा की बहुत खर्चा हो रहा और उसने चाय से लेकर प्याली तक हिसाब रखा। उन लोगो को घुमाने के लिए अजमेर सरीफ प्राइवेट बस करके भेजा और उसका भी हिसाब रखा। और उसके बाद अपने Accountant से अपना पूरा हिसाब बनवाया और बोला कितना हुआ तो उसने बताया की 3 लाख 52 हजार रुपये, तो उसने अपने तनख्वाह से उतने का चेक काट करके दे दिया। और कहा की राष्ट्रपति भवन सिर्फ राष्ट्रपति का ही जिम्मेवारी उठा सकती हैं, राष्ट्रपति के पुरे परिवार वालो की नही।

अब्दुल कलाम जी की वो आखिरी पल जब लोगों के आँखों में आंसू थे

अब्दुल कलाम जी की वो आखिरी पल जब लोगों के आँखों में आंसू थे

ये तो अब्दुल कलाम जी को भी पता नही था कि वो तारीख उनकी जिंदगी का आखिरी तारीख थी। अच्छे खासे दिख रहे थे सबसे बाते कर रहे थे, उस दिन 27 जुलाई 2015 को IIM छात्रों को एक Surprised Assignment देना चाहते थे। जब इनका 6 – 7 कारों का काफिला शिलोंग के लिए निकला तो सबसे आगे एक जिप्सी थी जिसमे सुरक्षाकर्मी थे। जो जिप्सी में बन्दुक लिए खड़ा था सफ़र के एक घंटे के बाद पूछा की वो खड़ा क्यों है वो थक जायेगा ये उसके लिए सजा जैसा है। और उसके पास तक ये संदेश पहुँचाया की वो बैठ जाये, लेकिन ऐसा नहीं हुआ उसके बाद उसने कहा की वो उस जवान से मिलना चाहते हैं। और उसे शुक्रिया अदा करना चाहते हैं शिलोंग पहुँचने के बाद अब्दुल कलाम जी के सहायक उस जवान के पास ले जाते हैं।

और उसके बाद कलाम जी ने उसका अभिवादन किया और उससे हाथ मिलाया और कहा की शुक्रिया दोस्त

और कलाम जी उनसे पूछा की क्या तुम थके हुए हो कुछ खाना चाहोगे माफ़ करना तुम्हे मेरी वजह से

इतनी देर तक खड़ा रहना पड़ा। इस पर जवान का आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या कहे उनसे फिर उसने कहा आपके खातिर तो हम 6 घंटा भी खड़ा रह सकते हैं। ये हमारा कर्तव्य है, जब अब्दुल कलाम जी 27 जुलाई 2015 को करीब 6 : 35 पे शिलोंग के IIM के मंच पर भाषण देना शुरू करते हैं। अभी 5 मिनट ही हुआ था की भाषण देते देते अब्दुल कलाम जी गिर गए और उन्हें तुरंत वेधानी अस्पताल जे जाया गया जो IIM से करीब 1 किलोमीटर की दुरी पर था लेकिन तब तक कलाम जी सब को छोड़ के जा चुके थे।

अब्दुल कलाम जी को दिल का दौरा पड़ा, और लेक्चर देते देते उनकी मृत्यु हो गई। ये लेक्चर उनकी

जिंदगी का आखिरी लेक्चर बन गई, किनको पता था की कलाम जी की ये कलाम आखिरी हो जाएगी।

जब देश को पता चला की हमारे देश के आम राष्ट्रपति ए. पी. जे . अब्दुल कलाम जी जिसके दरवाजे हर किसी के लिए हमेशा खुले रहते थे। भारत देश के पूर्व राष्ट्रपति रह चुके ए. पी. जे . अब्दुल कलाम जी को दिल का दौरा पड़ने से आकस्मिक निधन हो गया, तो पूरा देश शोक में डूब गया हर किसी के आँखों में आंसू थे। ये कैसे हो सकता है, हर समय सब को ज्ञान देने वाले महापुरुष कलाम जी कैसे अचानक छोड़ के जा सकते हैं। अब्दुल कलाम जी का पार्थिव शरीर तिरंगा में लिपटा हुआ शिलोंग से सेना की जहाज से दिल्ली लाया गया। पार्थिव शरीर सेना के कंधो पर थी, उसके बाद तीनो सेनादल मिसाइल मेन अब्दुल कलाम जी को सलामी देते हैं। दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर सभी नेता अभिनेता बड़े बड़े सेलेब्रिटी आखिरी श्रधांजलि अर्पित करने के लिए पहुँचते हैं

अब्दुल कलाम जो सचिन जी श्रधांजलि  देते हुए
अब्दुल कलाम जी का आखिरी tweet
आखिरी tweet
अब्दुल कलाम जी का आखिरी tweet

IIM के छात्रो को कलाम जी Surprised Assignment में क्या देना चाहते थे?

दरअसल उस दिन अब्दुल कलाम जी शिलोंग के IIM छात्रों को एक Surprised Assignment देना चाहते थे

और अब्दुल कलाम जी IIM के छात्रो से एक ऐसा आईडिया चाहते थे, IIM के छात्र उन्हें एक आईडिया दे जिससे संसद में गतिरोध को खत्म किया जा सके, लेकिन ये Assignment पूरा न हो सका।

Apj Abdul Kalam जी बचपन में किस तरह मेहनत किया करते थे?

जब वो पांचवी क्लास में थे तब क्लास में एक मास्टर जी सिखा रहे थे की चिड़ियाँ कैसे उड़ती है।

किसी को बोर्ड पे समझ नही आ रही थी, तो मास्टरजी अच्छे से समझाने के लिए बच्चो को क्लास के बाहर उड़ते चिड़ियाँ को दिखाने के लिए ले जाते हैं, और वहां मास्टर जी लाइव उड़ते चिड़ियाँ के बारे में बताते है कि देखो चिड़ियाँ कैसे उड़ती है पूरी डिटेल्स में बताते हैं। यहाँ से अब्दुल कलाम जी को पक्षियों के बारे में अच्छे से समझ आता है की वो कैसे उड़ते हैं। और यहाँ से अब्दुल कलाम जी को ऐरोनोटिक के बारे में अच्छे से समझ में आता है, और यहीं से वो एक सपना देखन शुरू कर देते हैं।

उस समय इनके गाँव से कई किलोमीटर दूर एक गणित के मास्टर हुआ करते थे जो बहुत ही बढ़िया गणित पढाया करते थे। मास्टरजी बोलते हैं कि जो भी बच्चा सुबह 4 बजे नहा धोकर आएगा उसे मैं एक घंटा गणित की क्लास फ्री में पढ़ाऊंगा। Apj Abdul Kalam सुबह 3 बजे उठकर ठन्डे पानी से नहा कर मौसम चाहे कैसा भी हो कलाम जी रेडी होकर कई किलोमीटर दूर 4 बजे मास्टर जी के घर पहुँच जाते थे।

जब Apj Abdul Kalam जी रात को घर में पढ़ते थे तो उसके घर में केरोसिन तेल की लालटेन हुआ करती थी जो सिर्फ 2 घंटे तक ही जलती थी। क्योंकि उनके पास उस वक्त उतना केरोसिन तेल नहीं हुआ करते थे, जब इनके माता पिताजी ने देखा की रात रात भर लालटेन के नीचे कलाम जी पढता है, और लालटेन सिर्फ कुछ घंटो तक ही जलता है। तो इसके लिए इनके माता पिता जी ने किसी तरह लालटेन को ज्यादा समय तक जलाने की जुगाड़ लगाई, और कलाम जी भी कभी मेहनत करने से पीछे नहीं हटे।

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Anshuman Choudhary

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