5G Huawei का Technology सुर्ख़ियों में क्यों है? | Huawei 5G Products

5G Huawei का Technology

Huawei 5G Frequency ( आवृत्ति) की तरंगे छोटी हो जाती है और हमारे शरीर के त्वचा द्वारा सोख ले जाती है

इससे त्वचा कैंसर होने की संभावना है। इस पर अभी रिसर्च ही चल रहा है अभी साबित नहीं हुई है

चीनी कंपनी Huawei Technologies और ZTE Corporation पर अमेरिका के नागरिकों का डेटा चुरा कर अपने देश के चाइना

सरकार के साथ साझा करने के साथ साथ अमेरिकी नागरिकों की जासूसी करने का काम भी कर रही है ऐसा आरोप लगा है।

Huawei 5G Technology और Global geo-politics

हाल में ही संयुक्त राज्य अमेरिका ने चीन की Telecom कंपनी Huawei Technologies और ZTE Corporation और उनसे जुड़े

हर कंपनी को Formal रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष और वैश्विक स्तर तक को खतरा ( National Security Threat) बताया।

Huawei techniques एक Multinational कंपनी है जो Telecommunication equipment और consumer Electronics को

डिज़ाइन करके बेचने का काम करती है

Confederation of all India Traders – CAIT ( अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ) ने चीनी कम्पनी Huawei Technologies और ZTE Corporation को

भारत में  5G नेटवर्क के Band नीलामी में शामिल न करने का request किया है कि दोनों कंपनियों की Technology और इसके Devices को किसी अन्य कंपनियों के साथ 5G नेटवर्क संबंधित उपयोग पर भी प्रतिबंधित किया जाना चाहिए CAIT ने ऐसा कहा हैभारत और चीन के बीच के तनावपूर्ण संबंधों को लेकर भारत सरकार ने Security और strategy से संबंधित अन्य मुद्दों के आधार पर इन दोनों कंपनियों को भारत में 5G नेटवर्क Operate न करने की सलाह दी हैं

भारत में  5G नेटवर्क | 5G invest in India | many Issue

इंडिया में  5G नेटवर्क शुरू करने के लिए करीब 5 लाख करोड़ रुपये Invest की आवश्यकता है भारत का Spectrum बाकि देशो के मुकाबले

बहुत महंगा Spectrum होता है हर बार की नीलामी में 30 से 40% Spectrum सेल ही नहीं हो पाता है।

भारत में 5G नेटवर्क पर काम करने के लिए कंपनियों को बहुत सी समस्याएं का सामना करना पड़ता है,

सभी राज्यों के जटिल प्रकियाओ से गुजरना पड़ता है सभी राज्यों में अलग अलग Tax structure है, Government approval में देरी होती है। Telecom service providers को Optical Fibre Cable (OFC) बिछाने में और Telecommunication towers को स्थापित करने में बहुत कठिनयियो का सामना करना पड़ता है। Optical Fibre Cable का कम विस्तार – भारत की 5G technology और Global internet के साथ संचार करने का माध्यम की कमी है। भारत में 20% से कम मोबाइल टावर Optical Fibre Cable के माध्यम से जुड़ा है, बैकहॉल एक ऐसा नेटवर्क होता है जो मोबाइल टावरो के Centre Exchange से जोड़ता है, जिसकी भारत में कमी है।

Heavy import of equipment – भारत की Telecom उपकरण (equipment) बाज़ार में विदेशी उपकरणों (आयातित उपकरणों ) की हिस्सेदारी करीब 90% है।

स्थानीय Manufacturing और Research & Development की कमी के कारण भारतीय Telecom Service Providers के पास विदेशी Suppliers से

5G टेक्नोलॉजी खरीदने और उसे स्थापित करने के आलावा कोई दूसरा Option नहीं बचताSecurity  – International Telecommunication Union ( अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ – ITU)

द्वारा जारी worldwide Cyber ​​security index ( वैश्विक साइबर सुरक्षा सूचकांक ) के अनुसार सभी देशों में से केवल

आधे देशों के पास ही साइबर सुरक्षा से संबंधित रणनीति है, बाकी के देश विकसित करने में लगे हैं।

साइबर सुरक्षा के मामले में सिंगापुर सबसे ऊपर है, और भारत का स्थान 23वां है।

भारत में 5G टेक्नोलॉजी काम की रफ़्तार

Provision of technology and infrastructure ( प्रौद्योगिकी और अवसरंचना का प्रावधान ) – Basic Technology and Manufacturing ( आधारभूत प्रौद्योगिकी और विनिर्माण ) 5G और मुख्यत: सभी Information टेक्नोलॉजी के लिए Basic technology के विकास और Manufacturing में भारत का Construction करने हेतु अधिक व्यापक रूप से गहन व लम्बे समय तक research की आवश्यकता है। जब टेक्नोलॉजी बढ़ रहा है तो इसके क्लाउड डेटा को सुरक्षित करना भी महत्वपूर्ण हो जाता है। क्योंकि मोबाइल components virtual (आभासी) होते हैं, यानि प्रत्येक वो वास्तु के गुण जो वास्तविक में दिखता नहीं है लेकिन वास्तविक सभी गुणों का होने का आभास/ एहसास कराती है

आभासी सॉफ्टवेयर Infrastructure पर स्थापित किये जाते हैं इन software से related विशिष्ट जोखिमों को cover करने के लिए

नेटवर्क Providers को encryption (कूटबद्ध) नेटवर्क निगरानी आदि संबंधी समाधान विकसित हेतु साइबर सुरक्षा कंपनियो  के साथ

सहयोग करने की आवश्यकता है

सुरक्षा के नजर से इसमें क्या क्या होना चाहिए

निजता का प्रावधान की जरुरत - Privacy provision 5G टेक्नोलॉजी के अंगीकरण (Adoption) का समर्थन करने वाले अधिक branches की Availability (उपलब्धता) हेतु Strong डेटा संरक्षण Policy और विधि (Method) का निर्माण करने की आवश्यकता है
  • Data related priority (प्राथमिकता)  मोबाइल operators को Hybrid Cloud based approach अपनाने की आवश्यकता है
  • जिसमे Sensitive डेटा को स्रूथायी प से और कम  Sensitive डेटा Cloud में Stored किया जाना चाहिए
भारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति ( National cyber security strategy - NCSS) - सरकार राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति 2013 ( National cyber security policy, 2013) को अद्दतित करके NCSS को लागू करने की योजना बना रही है। य़ह नीति 5G टेक्नोलॉजी द्वारा सामना किए जाने वाले साइबर सुरक्षा मुद्दों को सम्मिलित कर सकती है ताकि सुरक्षा के दृष्टिकोण से इसे विधिक ढांचा (Legal framework) प्रदान किया जा सके।
नीतिगत प्रावधान - Policy provisions Spectrum policy (स्पेक्ट्रम नीति) - विभिन्न बैंडो को वायरलेस बैकहॉल और WiFi तक पहुंचा के उचित रूप से विभाजित करके 5G स्पेक्ट्रम को कई चरणों में आवंटित किया जा सकता है।
  • 5G टेक्नोलॉजी Future की सर्वव्यापी (Ubiquitous) technologies में से एक है जो भारत को Leading (अग्रणी) करने के लिए एक अच्छा opportunity देती है। भारत को शीघ्र ही व्यापक रूप से 5G Network स्थापित करके इस्तेमाल में लाना चाहिए Covid-19 के दौरान बढ़ती Connectivity की मांगों को देखते हुए, इस समय आपदा को opportunity  में बदलते हुए 5G technologies की स्थापना की दिशा में तेजी लाने की आवश्यकता है

5G को आरंभ करने की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदम – भारत में 5G technologies के लिए सुस्पष्ट (Conspicuous)

दृष्टिकोण तैयार करने और उसे साकार करने के लिए नीतिगत पहलों और कार्य योजनाओं की Recommendation (अनुशंसा) करने हेतु

सरकार द्वारा वर्ष 2017 में 5G उच्च स्तरीय मंच (5G high level Forum) का गठन किया गया था।

दूरसंचार विभाग (Telecom department)  (DoT) ने 5G technologies के प्रदर्शन प्रयोजनो (Performance purposes) के लिए स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराकर testing (परीक्षण) विधि को आसान बनाया।

राष्टीय डिजिटल संचार नीति 2018 ( National digital Communication policy NDCP – 2018) ने भारत में 5G सेवाओं के संबंध में निम्नलिखित उद्देश्य निर्धारित करती है। 

कई 5G  technologies को लागू करके High speed internet और M2M (मशीन से मशीन) सेवाओं को सक्षम बनाना।

और आने वाली पीढ़ी के नेटवर्क के विकास का समर्थन करके बैकहॉल क्षमता में सुधार करना।

फ़िलहाल भारत में जो Band की नीलामी हो रही है वो 4G की ही हो रही और अभी शायद

700 MHz Band की हो रही है बाकियो के बैंड का नीलामी होती रहेगी, MHz Band के बारे में अगले article में बेहतर ढंग से बताएँगे

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Anshuman Choudhary

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