Drone Regulations in India | DGCA Drone license application

अगर आप भारत में रहते हैं तो आपको Drone Regulations ( ड्रोन संबंधी विनियमन ) के बारे में पता होना चाहिए

आज इसी Drone Regulations के बारे में आपको बताएँगे की भारत में ड्रोन उड़ाने के क्या क्या नियम है? ये कब से लागू किये गए हैं कौन कौन से जुर्माने लगाये गए हैं? और क्या इसमें सजा का भी प्रावधान है। जब शुरू शुरू मार्केट में ड्रोन आया था तब इस तरह का कोई भी Drone Regulations ( ड्रोन संबंधी विनियमन ) नहीं थीलेकिन कुछ अहम् सुरक्षा और Privacy जैसे बहुत सारी बातो को मद्देनजर रखते हुए केंद्र सरकार ने ड्रोन से संबंधित कुछ बेहद Important Rule Regulations बनाया जिसे हर किसी को मानना होगा नहीं तो आप ड्रोन नहीं उड़ा सकते है, और गर आप बगैर परमिशन के

उड़ाते पाए गए तो आप पर जुर्माना भी लगेगा साथ में जेल भी हो सकती है।

Drone Regulations ( ड्रोन संबंधी विनियमन )

drone regulations in India जो नागर विमानन मंत्रालय ( Civil Aviation Ministry ) के अधीन आता है

ड्रोनों और उसके संचालक को अपनी इच्छानुसार पंजीकरण कराने के लिए 31 जनवरी 2020 तक अंतिम सीमा निर्धारित किया था।

सबसे पहले ड्रोन मालिक या संचालक को online DAN ( Drone Acknowledgement Number DAN – ड्रोन पावती संख्या ) लेना होगा।

जिससे भारत में ड्रोन संचालन को वैधानिकता प्रदान करने में सहायता मिलेगी, ये तो अभी पहला चरण है।

DAN या OAN लेने के बाद भी आप ड्रोन को उड़ा नहीं सकते हैं। जब तक कि आप DGCA ( नागर विमानन महानिदेशालय ) द्वारा निर्धारित ड्रोन विनियमनों प्रावधानों को पूरा नहीं कर लेते। इसके अतिरिक्त भारत में वैधानिक DAN अथवा OAN प्राप्त न होने की स्थिति में ड्रोन के स्वामित्व यानि जो इसे बेच भी रहा है उसके विरुद्ध क़ानूनी करवाई की जा सकती है।

Drone in India | Can you carry drone to India?

Civil Aviation Ministry ( नागर विमानन मंत्रालय ) के अनुसार ड्रोन को टेक्निकल प्लेटफार्म आधार के रूप में देखा जा रहा है।

Photography और agriculture मैनेजमेंट के लिए ये एक अच्छा अवसर माना जा रहा है। Drone कई प्रकार के होते हैं

सब में कुछ न कुछ अलग होता है, कोई आकार में बड़ा है तो कोई छोटा तो कोई वजन में भारी है तो कोई हल्का, इस प्रकार नागर विमानन महानिदेशालय ( DGCA – Directorate General of civil Aviation ) ने Drone को निम्नलिखित 5 Category में बांटा है।

1. NANO – 250 ग्राम से कम या इसके बराबर वाले को इस श्रेणी में रखा गया है
2. MICRO – 250 ग्राम से लेकर 2 KG तक वाले को इस श्रेणी में रखा गया है
3. MINI – 2 किलोग्राम से लेकर 25 किलोग्राम वाले इस श्रेणी में आते हैं
4. MEDIUM – 25 किलोग्राम से लेकर 150 किलोग्राम तक वाले इस श्रेणी में आते हैं
5. LARGE – 150 किलोग्राम और इससे अधिक वजन वाले इस श्रेणी में आते हैं

2021 में भारत में मानव रहित विमान प्रणालियों ( Unmanned Aircraft System : UAS ) का औद्योगिक मूल्य ( Industrial value )

करीब 885.9 मिलियन डॉलर तथा वैश्विक बाजार ( Global market ) का आकार करीब 21.50 बिलियन डॉलर तक पहुंचना अनुमान है।

भारत में अक्टूबर – दिसम्बर 2019 तक अवैध ( Illegal ) ड्रोनो की संख्या करीब 50000 से 60000 के बीच होने की संभावना थी, जिसका इस्तेमाल लोग किसी वक्त भी कहीं भी कर रहे थे, एक तरह से इसका गलत भी हो सकता था किसी की जासूसी भी बड़े आसानी से किया जा सकता था। जिसको मद्देनजर रखते हुए केंद्र सरकार ने भारत में ड्रोन विनियमन ( Drone Regulations ) लाने का फैसला लिया।

भारत में ड्रोन विनियमन ( Drone Regulation in India )

अगस्त 2018  में केंद्र सरकार द्वारा ड्रोन विनियमन ( Drone Regulation ) 1.0 के मापदंडों की पहली सूची Publish की गई।

जिसमे केवल दिन के समय में ही विजुअल लाइन ऑफ साइट में और अधिकतम ऊंचाई 400 फिट तक ही

ड्रोनो को उड़ाने की अनुमति दी है। कुछ ऐसी जगह हैं जहाँ ड्रोनो को उड़ाना मना है जो निम्न है –

रेड जोन (RED ZONE) जो कि नो फ्लाई जोन को संदर्भित करता है, जिसके अंतर्गत आप हवाई अड्डों के आसपास के 5 किलोमीटर के दायरे में ड्रोन को उड़ा नहीं सकते है। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं ( International Border ) के आसपास के 25 किलोमीटर क्षेत्र के दायरे में ड्रोन उड़ा नहीं सकते है।

दिल्ली में विजय चौक राज्य की राजधानियों में राज्य सचिवालय परिसर रणनीतिक स्थानों/महत्वपूर्ण और सैन्य प्रतिष्ठान आदि इसमें शामिल है)।

यलो जोन ( Yellow Zone ) के अंतर्गत क्षेत्र, इस हवाई क्षेत्र में ड्रोन संचालन यानि उड़ाने के लिए आपको डिफेंस क्लीयरेंस या एयर ट्रैफिक कंट्रोल क्लीयरेंस की आवश्यकता पड़ती है।

ग्रीन जोन ( Green Zone ) हवाई क्षेत्र को संदर्भित करता है, हालांकि ग्रीन जोन के लिए भी आपको डिजिटल स्काई ( Digitalsky ) प्लेटफार्म से स्वीकृति प्रदान करने की आवश्यकता होती है।

नियमों के तहत ड्रोन ऑपरेटरों के लिए एक विशिष्ट पहचान संख्या ( Unique identification number-UIN) मानव रहित एयरक्राफ्ट संचालन कर्मी

और अन्य संचालन परमिट ( Unmanned Aircraft Operator Permit : UAOP ) और अन्य संचालन आवश्यकताएं संबंधी अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

वर्तमान में भारत में नो परमिशन नो टेक ऑफ ( NPNT ) क्लॉज लागू है, जिसके तहत आप डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म से नियामक अनुमति प्राप्त न होने तक ड्रोन को भारतीय अंतरिक्ष में उड़ा नहीं सकते हैं।

ड्रोन उपयोगकर्ताओं को अपने ड्रोन पायलट और स्वामियों का एक बार पंजीकरण करवाना अति आवश्यक है

प्रत्येक उड़ान ( नैनो श्रेणी के लिए छूट) से पूर्व उपयोगकर्ताओं को मोबाइल एप्स के माध्यम से उड़ान भरने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है

तथा यह ऐप एक स्वचालित प्रक्रिया के माध्यम से अनुरोध की जांच कर शीघ्र ही अनुमति दे देती है

अथवा अनुरोध को अस्वीकृत ( Reject ) कर देगी। पायलट को ड्रोन उड़ाने से पहले रिमोट पायलट लाइसेंस ( License )

और प्रमाणन ( Certification ) लेना अनिवार्य है जरुरी है। जनवरी 2019 में ड्रोन नीति 2.0 लाया गया जो एक श्वेत पत्र जारी किया गया था

जो ड्रोन के व्यापक अनुप्रयोग के लिए मार्ग प्रशस्त करता है इसके तहत ड्रोन के माध्यम से वस्तुओ की डिलीवरी और बियांड विजुअल लाइन ऑफ साइट ( BVLOS ) को भी शामिल किया गया है। वर्तमान में विदेशियों ( foreigners) को भारत में ड्रोन उड़ाने की अनुमति प्राप्त नहीं है। वाणिज्यिक उद्देश्य ( Commercial purpose ) के लिए, उन्हें ड्रोन एक भारतीय इकाई को पट्टे ( Lease ) पर देने की आवश्यकता होती है जो इसके बदले में DGCA से UIN और UAOP प्राप्त करेंगे।

Digital Sky Platform के बारे में कुछ अहम् जानकारियां

यह एक सॉफ्टवेयर स्व प्रवर्तनीय मानव रहित यातायात प्रबंधन ( Unmanned Traffic Management UTM ) प्रणाली है

जो संचालकों को प्रत्येक उड़ान के लिए तत्काल ऑनलाइन स्वीकृति प्रदान करने के अतिरिक्त ड्रोन एवम संचालकों के पंजीकरण और लाइसेंसिंग की सुविधा प्रदान करती है। यह प्लेटफार्म माइक्रो और उच्च श्रेणीयो में सभी ड्रोनो को विनियमित करता है। संचालकों को एक UIN  हेतु आवेदन करने की अनुमति प्रदान करता है, जिसे नागर विमानन नियामक द्वारा अनुमोदन हेतु सभी ड्रोन और मानव रहित एयरक्राफ्ट संचालन परमिट ऑनलाइन जारी किए जाने की आवश्यकता होती है।

मानव रहित एयरक्राफ्ट संचालन परमिट ( UAOP – Unmanned Aircraft Operator Permit )

मानव रहित एयरक्राफ्ट संचालन परमिट ( UAOP) एक परमिट है जो संचालक ( ड्रोन पर स्वामित्व अधिकार रखने वाले ) ड्रोन संचालन हेतु

अधिकार प्रदान करता है, जिसे नागर विमानन महानिदेशक से प्राप्त किया जा सकता है।

ये UAOPs हस्तांतरणीय ( Transferable ) नही होते हैं तथा पांच वर्ष से अधिक समय के लिए प्रयोज्य ( Applicable ) नही होंगे।

भारत की ड्राफ्ट ड्रोन नीति 2.0  (वर्ष 2019 में जारी ) Draft ड्रोन Policy of India 2.0

एयर फ्रेट ( Air Freight ) के नए रूपों की अनुमति : VLOS से परे और 400 फीट की वर्तमान सीमा से अधिक

के लिए परिचालन विस्तार की अनुशंसा करता है।

Drone Corridor : यह नीति गैर पृथक हवाई क्षेत्र (जिसमे मानवयुक्त विमान संचालित होते हैं) से वाणिज्यिक UAS संचालन को

बाहर रखने हेतु कॉरिडोर की परिकल्पना करती हैं। ( इसके साथ ही ड्रोन की लैंडिंग और टेक ऑफ़ की सुविधा हेतु ड्रोन पोर्ट्स नामक निर्दिष्ट क्षेत्र का भी प्रावधान करती है

ड्रोन की संचालन अवधि –  ड्रोन के लिए अधिकतम संचालन अवधि को प्रस्तावित किया गया है, ताकि संचालकों को ड्रोन की उड़ान क्षमता ( Airworthiness ) और ड्रोन की संचालन अवधि की समाप्ति पर पुन: प्रमाणन ( Recertification ) के लिए आवेदन करना होगा।

ड्रोन निदेशालय ( Drone directorate ) – यह नागर विमानन महानिदेशालय ( DGCA – Directorate General of civil Aviation) के अधीन एक ड्रोन निदेशालय स्थापित करने की अनुशंसा करती है।

डिजिटल स्काई सेवा प्रदाता ( Digital Sky service provider – DSPs ) यह भारत में पंजीकृत सार्वजनिक (Public) या निजी (Private) एजेंसियां को नए अभिकर्ताओ ( Agent ) के रूप में DSPs में शामिल करता है।

रात्रि के समय ड्रोन संचालन की अनुमति  – रात्रि के समय ड्रोन उड़ानों को सक्षम बनाने हेतु अनुमोदन और अन्य महत्वपूर्ण आवश्यकताएं। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ( Foreign Direct Investment – FDI ) यह अमेरिका और RPAS आधारित वाणिज्यिक नागर विमानन सेवाओं ( Commercial civil Aviation Services ) में स्वचालित ( Automatic ) मार्ग के तहत 100 % FDI के प्रस्तावित करती है, ड्रोन निति 1.0 के अंतर्गत FDI का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।

ड्रोन विनियमन की आवश्यकताएं ( Drone regulation requirements )

वाणिज्यिक संचालन हेतु ड्रोन की क्षमता का लाभ उठाना ( Leveraging the capability of drones for commercial operation ) : यह एयर फ्रेट क्षमताओं के विभिन्न नए स्वरूपों को बढ़ावा प्रदान करेगा जिससे तापमान और समय के प्रति संवेदनशील वस्तुओ जैसे  – शारीरिक अंगो, जीवन रक्षक दवाओ आदि का परिवहन ( Transport ) संभव होगा। इनका उपयोग कृषि सिंचाई भूदृश्यो का सर्वेक्षण सक्रीय रूप से रेल/ सड़क यातायात की निगरानी करने अथवा कृषि भूमि का सर्वेक्षण /निरिक्षण करने के लिए पूरक सामग्रियों ( supplementary materials ) की उपलब्धता हेतु भी किया जा सकता है।

सुरक्षा अनिवार्यता ( Security imperative ) : नए खतरे और संभावित क्षमता को देखते हुए इसमें समग्र सुरक्षा परिवेश ( जिसमे विमानन क्षेत्र भी शामिल है) के समक्ष जोखिम को उत्पन्न करने की क्षमता विद्यमान है इस कारण एक सुसंगत ड्रोन नीति  ( well Articulated drone policy ) की आवश्यकता है।

ड्रोन को हथियार के रूप में प्रयोग ( Drone Weaponization )  : वाणिज्यिक ड्रोन ( Commercial Drone ) बाजार के उचित विनियमन के बिना, ड्रोन का हथियार के रूप में प्रयोग से cybar खतरों को बढ़ावा मिल सकता है तथा यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक चिंता का विषय बन सकता है।

हालिया वैश्विक हमले ( Recent global attacks ) : जैसे सऊदी अरब की रिफायनरियो पर ड्रोन हमला और ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर की हत्या इसके कुछ उदाहरण है।

निजता संबंधी चिंताएँ ( Privacy Concerns ) :  वर्तमान सोशल मीडिया (social media) और डिजिटल संचार (digital communications) के युग में ड्रोन की

इमेजिंग क्षमताएं एक वृहत खतरा उत्पन्न करती है, क्योंकि इनका उपयोग लोगो को ब्लैक मेल (blackmailing) करके अथवा अवांछित निगरानी पर नियंत्रण स्थापित करके निजता का उल्लंघन करने हेतु किया जा सकता है। ड्रोन स्टार्ट अप eco system को बढ़ावा प्रदान करना : ड्रोन/ UAVs को अभी भी एक उभरती हुई तकनीक के रूप में संदर्भित किया जाता है तथा वर्तमान में भारत में लगभग 40 ड्रोन start Ups सक्रिय है। Start ups और विनिर्माताओ द्वारा संचालित एक सुदृढ़ ड्रोन उद्योग में भारत के विमानन क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा पप्रदान करने की क्षमता विधमान है।

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Drone Register online Official site :https://digitalsky.dgca.gov.in/home

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Anshuman Choudhary

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