Nobel Prizes 2019 | नोबेल पुरस्कार 2019

Nobel Prizes 2019 in physiology or medicine

तो आज बात करेंगे Nobel Prizes 2019 के बारे में, किन किन लोगों को ये पुरस्कार अभी तक दिया गया।

यह पुरस्कार विश्व के सर्वोच्च तथा सर्वाधिक राशि ( पैसे ) वाले अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में सबसे ऊपर है, जो हर साल

इसके संस्थापक स्वीडिश रसायनशास्त्री तथा उद्योगपति अल्फ्रेड नोबेल ( 1833 – 1886 ) की पुण्यतिथि अवसर पर 10 दिसम्बर को दिया जाता हैं।

यह पुरस्कार उसकी योग्यता के अनुसार उसके किये गए किसी क्षेत्र में अच्छे योगदान के बदले इस पुरस्कार से उसे पुरस्कृत किया जाता है। और साथ में ईनाम राशि भी जाती हैं। नोबेल पुरस्कार कई क्षेत्रो में प्रदान किया जाता है, जैसे की भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र, शारीरिक क्रिया विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान, शाहित्य तथा विश्व शांति क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सब पुरस्कार दिया जाता है। पुरस्कार की शुरुआत 1901 से शुरू हुई थी, 1969 से यह पुरस्कार अर्थशास्त्र क्षेत्र में भी दिया जाने लगा। इस पुरस्कार में पदक नोबेल प्रशस्ति – पत्र तथा 90 लाख स्वीडन क्रोनर ( करीब 9,40,000 अमेरिकी डॉलर ) राशि प्रदान की जाती हैं।

फिजियोलॉजी या चिकित्सा (physiology or medicine ) क्षेत्र में किन किन लोगों को वर्ष 2019 में नोबल पुरस्कार दिया गया?

वर्ष 2019 में फिजियोलॉजी या चिकित्सा में विलियम कैलीन, पीटर रैटक्लिफ और ग्रेग सेमेंजा को नोबेल पुरस्कार दिया।

तो वर्ष 2019 में तीन लोगों को फिजियोलॉजी या चिकित्सा क्षेत्र में नोबेल ( Nobel Prizes ) पुरस्कार दिया गया। तो इन लोगों के द्वारा यह खोज की गई थी कि मानव शरीर में जो कोशिकाएं होती है, वो ऑक्सीजन के स्तर में यानी कि ऑक्सीजन के कम और ज्यादा होने पर किस तरह से कोशिकाएं प्रतिक्रिया करती है। इस अनुसंधान ( शोध ) के माध्यम से यह बताने का प्रयत्न किया गया की कोशिकाएं वायुमंडल में ऑक्सीजन की उच्च या निम्न मात्रा होने पर खुद को मौसम के हिसाब से किस प्रकार अनुकूलित कर लेती है।

इनसे जुड़ी अन्य तथ्य

शरीर में ऑक्सीजन कमी की एहसास होने पर किडनी से एरिथ्रोपोइटिन या EPO नामक एक हार्मोन स्रावित होता है

जो शरीर को ऑक्सीजन का अधिक परिवहन करने के लिए अधिक लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन हेतु निर्देशित करता है।

इन्होंने ज्ञात किया कि जब निकटवर्ती परिवेश में ऑक्सीजन का स्तर कम होता है तो हाइपॉक्सिया एंड्यूसबल फैक्टर (HIF) नामक एक प्रोटीन सक्रिय हो जाती है। और HIF तब EPO का उत्पादन करने वाले जीन के DNA खंड के साथ संयोजित हो जाता है। EPO जीन के निकट अतिरिक्त HIF प्रोटीन, हार्मोन के उत्पादन के लिए टर्बो चार्ज की भांति कार्य करता है, जो आवश्यकता पड़ने पर शरीर को अधिक लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन के लिए निर्देशित करता है। जब पुनः पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध हो जाती है तो HIF के स्तर में कमी हो जाती है, साथ ही लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या भी कम हो जाती है। रोग नियंत्रण में सहायता होगी इस प्रणाली से उत्पन्न होने वाले रोगों के विषय में अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है,

जैसे कि कैंसर से जो ट्यूमर को विकसित करने के लिए ऑक्सीजन संवेदी प्रणाली का उपयोग करता है।

यह शोध कैंसर और एनीमिया जैसे घातक रोगों के उपचार करने में सहायता प्रदान करेगी।

औषधि फॉर्मूलेशन : पहले से ही इस ऑक्सीजन संवेदी की समझ के आधार पर कई औषधियों बनाया जा चुका है।

रक्त वाहिका की अवरोधकता पर अधिक प्रयोगात्मक औषधियों का उपयोग कर

कुछ प्रकार के कैंसर में ट्यूमर को विकास को रोकने के उद्देश्य से किया जा सकता है।

शरीर की कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से समझने में आसानी होगी, यह सोध नई रक्त वाहिकाओं के निर्माण लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन कुछ प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्यों तथा यहां तक कि भ्रूण एवं गर्भनाल के विकास से संबंधित प्रतिक्रियाओं को समझने में भी सहायता कर सकता है।

Nobel Prizes 2019 in Chemistry ( रसायन विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार )

अमेरिका के वैज्ञानिक जॉन गुडइनफ, ब्रिटेन के वैज्ञानिक स्टेनली व्हिटिंगम और जापान की अकीरा योशीनो को संयुक्त रुप से वर्ष 2019 के लिए रसायन विज्ञान के क्षेत्र मे नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया । इन्हें ये पुरुस्कार लिथियम आयन बैटरी के विकास में योगदान के लिए प्रदान किया गया है।

इससे जुड़े अन्य तथ्य

एम. स्टेनली व्हिटिंगम के द्वारा 1970 के दशक में लिथियम (Li) आयन बैटरियों के विकास की शुरुआत की गई थी।

जब इन्होंने टाइटेनियम डाई सल्फाइड को कैथोड और अत्यधिक अभिक्रियाशील लिथियम धातु को एनोड के रूप में प्रयुक्त किया।

जॉन बी. गुडइनफ ने 1980 के दशक में बैटरी की क्षमता को दोगुना करने के लिए कैथोड पर टाइटेनियम डायल सल्फाइड को कोबाल्ट ऑक्साइड द्वारा प्रतिस्थापित किया था। हालांकि अभिक्रियाशील लिथियम का उपयोग चिंता का विषय बना रहा।

अकीरा योशीनो ने वर्ष 1991 में व्यवसायिक रूप से व्यवहार्य प्रथम लिथियम बैटरी विकसित की गई।

इन्होंने लिथियम एनोड को पेट्रोलियम कोक एनोड से प्रतिस्थापित कर दिया,

जिसने लिथियम ( Li ) आयनो को लिथियम ऑक्साइड कैथोड से एनोड की ओर आकर्षित किया।

लिथियम आयन बैटरी से संबंधित अन्य तथ्य

लिथियम बैटरी एक प्रकार के रिचार्जेबल बैटरी होती है।

इस बैटरी का उपयोग सामान्यता पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक्स स्मार्टफोन लैपटॉप आदि में किया जाता हैं। और इलेक्ट्रिक वाहनों तथा सैन्य, एयरोस्पेस अनुप्रयोगों के लिए भी किया जाता है। यह हल्के वजन और उच्च ऊर्जा घनत्व ( अर्थात अन्य प्रकार की बैटरियों की तुलना में प्रति यूनिट अधिक ऊर्जा का भंडारण कर सकती है ) वाली होता है। ये बैटरी के प्रति किलोग्राम 150 वाट घंटे विधुत भंडारित करने में सक्षम होती है। लिथियम आयन बैटरी सेल निकेल कैडमियम बैटरी जैसी तकनीको की तुलना में 3 गुना अधिक अर्थात 3.6 वोल्ट तक ऊर्जा प्रदान कर सकती हैं।

लेड एसिड बैटरी को उसके संपूर्ण उपयोग विधि में केवल 400 से 500 बार ही चार्ज किया जा सकता है

जबकि रिचार्जेबल लिथियम आयन बैटरी को 5000 या इससे अधिक बार चार्ज किया जा सकता है।

अन्य बैटरियों के मुकाबले इसको कम रखरखाव की आवश्यकता पड़ती है।

तथा उपयोग के विधि में बैटरी लाइफ (Battory life) बनाए रखने के लिए नियमित रूप से चक्र ( scheduled cycling) शेड्यूल साइकिलिंग की आवश्यकता भी नहीं पड़ती है। लिथियम आयन बैटरी में मेमोरी इफेक्ट (Memory Effect) नहीं होता है अर्थात यह एक क्षतिकारी प्रक्रिया होती है जहां बार-बार आंशिक डिस्चार्ज/चार्ज चक्र एक बैटरी की भंडारण क्षमता को कम कर सकता है। लिथियम आयन बैटरी में स्वत: डिस्चार्ज की दर ( self dishcharge rate) प्रति माह लगभग अति न्यून 1.5 से लेकर 2.0 प्रतिशत ही होती है। इनमें विषाक्त पदार्थ  का उपयोग नहीं किया जाता है इस कारण रेडियम में बैटरी की तुलना में इनका निस्तारण डिस्पोजल ( Dispose) आसान हो जाता है।

लिथियम आयन बैटरी की कुछ सीमाएं

इसमे अधिक गर्म होने की प्रवृत्ति होती है तथा यह उच्च वोल्टेज पर क्षतिग्रस्त भी हो सकती है। कुछ मामलों में प्रज्वलित भी हो सकती है। यह गुणधर्म अधिक मात्रा में लिथियम बैटरियों को अन्यत्र परिवहन को प्रतिबंधित करता है। लिथियम आयन बैटरी को वोल्टेज और आंतरिक दबाव को सीमित करने के लिए सुरक्षा तंत्र की आवश्यकता होती है जो कुछ मामलों में उनके वजन में वृद्धि कर सकती है और कार्य निष्पादन को सीमित कर सकती है। इनकी उच्च कीमतें (निकल कैडमियम nickel-cadmium बैटरी की तुलना में 40% अधिक हैं ) व्यापक स्तर पर इसके अंगीकरण के समक्ष बाधक बनी हुई है।

Nobel Prizes 2019 in Physics (भौतिकी क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार)

भौतिकी क्षेत्र में स्विट्जरलैंड के मिशेल मेयर, डीडीएर क्वेलेज और कनाडाई अमेरिकी भौतिकविद जेम्स पिबल्स को

संयुक्त रूप से वर्ष 2019 के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

यह पुरस्कार ब्रह्मांड की उत्पत्ति और उसमे पृथ्वी के स्थान पर हमारी समझ में योगदान के लिए प्रदान किया गया।

जेम्स पीबल्स को ब्रह्मांड विज्ञान के क्षेत्र में सैद्धांतिक खोजो के लिए सम्मानित किया गया। जेम्स पीबल्स के सैद्धांतिक उपकरण बिग बैंग से लेकर वर्तमान समय तक ब्रह्मांड के इतिहास पर हमारी आधुनिक समझ की आधारशिला है। उनके सैद्धांतिक उपकरण और गणनाएं ब्रह्मांड के आरंभिक अवस्था के चिन्हों की व्याख्या करने एवं पहचान करने में अधिक सहायक रहे हैं।

मिशेल मेयर और डीडीएर क्वेलेज को सौर मंडल के समान तारे के परिक्रमा करते बहिरगृह ( इक्जोप्लेनेट) की खोज के लिए

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनके द्वारा वर्ष 1995 में हमारे सौरमंडल के बाहर प्रथम ग्रह की खोज गई।

इस बहिरगृह को 51 पेगासी B ( 51 Pegasi B) नाम दिया गया, जो हमारी आकाशगंगा मिल्की वे में एक सूर्य के समान तारे की परिक्रमा कर रहा है। इसमें खगोल विज्ञान में एक क्रांति की शुरुआत हुई क्योंकि तब से लेकर वर्तमान समय तक मिल्की वे में करीब 4000 से भी अधिक बहिरग्रहो की खोज की जा चुकी है। इन खोजो ने ग्रह प्रणालियों ( Planetary systems) के संबंध में विश्व वैज्ञानिकों के मौजूदा विचारों के समक्ष चुनौती उत्पन्न कर दी है। इसके आधार पर विकसित विचारों से पृथ्वी और सौरमंडल के बाहर जीवन का अस्तित्व है या नहीं इस संबंध में इन्सान को शाश्वत ज्ञान प्रदान करने में सहयता मिलेगी।

Nobel Prize 2019 in Peace ( शान्ति क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार )

यह शांति के क्षेत्र में देखा जाये तो नोबेल शांति पुरस्कार 2019 में अबी अहमद अली को “शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करने के प्रयासों के लिए, और साथ में विशेष रूप से पड़ोसी देश इरिट्रिया के साथ सीमा संघर्ष को हल करने के लिए उनकी निर्णायक पहल के लिए ये पुरस्कार प्रदान किया गया है।

इसके बाद के ब्लॉग में मैं आपको भारत में लिथियम आयन बैटरी के आयत पर बताऊंगा,

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Anshuman Choudhary

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